

केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता सुरेश गोपी ने सुप्रीम कोर्ट में एक अपील दायर की है। यह अपील केरल हाईकोर्ट के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ है जिसमें कोर्ट ने उनकी 2024 की लोकसभा चुनाव जीत को चुनौती देने वाली चुनावी याचिका को खारिज करने से इनकार कर दिया था [सुरेश गोपी बनाम बिनॉय एएस]।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने आज अपील पर नोटिस जारी किया और त्रिशूर के उस वोटर से जवाब मांगा, जिसने गोपी के चुनाव को चुनौती दी थी।
गोपी ने केरल हाईकोर्ट के जस्टिस कौसर एडप्पागाथ के 1 अप्रैल के फैसले को चुनौती दी है।
हाईकोर्ट ने कहा था कि त्रिशूर के वोटर और 'ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन' के नेता बिनॉय ए.एस. की ओर से दायर चुनाव याचिका सुनवाई के लायक है और उस पर आगे कार्रवाई होनी चाहिए।
गोपी केरल से बीजेपी के एकमात्र सांसद हैं।
बिनॉय की चुनाव याचिका में गोपी, उनके चुनाव एजेंट और उनके साथियों पर 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' की धारा 123 के तहत गलत तरीके अपनाने का आरोप लगाया गया था।
अन्य आरोपों के अलावा, बिनॉय ने दावा किया कि गोपी ने वोटरों से अपील करने के लिए धार्मिक प्रतीकों का गलत इस्तेमाल किया और चुनावी समर्थन पाने के लिए मोबाइल फोन जैसे तोहफे देने का वादा किया।
याचिका में सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए उन वीडियो का भी हवाला दिया गया, जिनमें कथित तौर पर गोपी संभावित वोटरों को पैसे का लालच देते हुए दिख रहे थे।
बिनॉय ने यह भी आरोप लगाया कि गोपी के चुनाव प्रचार से जुड़े एक प्रचारक ने वोटरों से उनके लिए वोट करते समय किसी हिंदू देवता के बारे में सोचने को कहा था। उस प्रचारक पर भगवान राम से जुड़े धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया गया था।
गोपी ने चुनाव याचिका की स्वीकार्यता पर शुरुआती आपत्तियां उठाई थीं और इसे शुरुआत में ही खारिज करने की मांग की थी।
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