

तहलका के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल ने 2013 के रेप केस में बॉम्बे हाईकोर्ट के हालिया फैसले, जिसमें उन्हें दोषी ठहराया गया था, को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
दोषी ठहराए जाने और दस साल की सज़ा के फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिका गुरुवार सुबह दायर की गई। चूंकि उन्हें सितंबर के पहले हफ़्ते में सरेंडर करना है, इसलिए इस मामले में जल्द सुनवाई के लिए अपील किए जाने की संभावना है।
6 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने ट्रायल कोर्ट के उस फ़ैसले को पलट दिया था जिसमें तेजपाल को बरी कर दिया गया था। तेजपाल पर 2013 में अपनी एक सहयोगी के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप था।
इससे पहले, गोवा सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर तेजपाल की दस साल की सज़ा को बढ़ाकर उम्रकैद करने की मांग की थी। राज्य की याचिका में यह साफ़ किया गया कि राज्य हाईकोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के फ़ैसले या निष्कर्षों को फिर से नहीं खोलना चाहता और न ही उन्हें चुनौती देना चाहता है।
यह मामला 2013 का है, जब तेजपाल पर गोवा के एक आलीशान होटल की लिफ़्ट में अपनी एक जूनियर सहयोगी के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था।
इसके बाद गोवा पुलिस ने तेजपाल के ख़िलाफ़ रेप समेत कई अपराधों के लिए FIR दर्ज की।
उन्हें नवंबर 2013 में गिरफ़्तार किया गया और बाद में जुलाई 2014 में ज़मानत पर रिहा कर दिया गया।
तेजपाल के ख़िलाफ़ मुक़दमा 2017 में शुरू हुआ और 4 साल तक चला। मई 2021 में ट्रायल कोर्ट ने तेजपाल को बरी कर दिया।
ट्रायल जज ने अपने फ़ैसले में कहा कि रेप केस की जांच करने वाले अफ़सर ने कई कमियां छोड़ी थीं और अभियोजन पक्ष CCTV फ़ुटेज समेत अहम सबूत पेश करने में नाकाम रहा।
इसके बाद राज्य सरकार ने बरी किए जाने के फ़ैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने इस साल 6 अगस्त को ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फ़ैसले को पलट दिया और तेजपाल को दोषी ठहराया। उन्हें 10 साल की जेल और 10 लाख रुपये से ज़्यादा का जुर्माना लगाया गया।
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Tarun Tejpal moves Supreme Court challenging conviction in 2013 rape case