

कांग्रेस विधायक दानम नागेंद्र ने सोमवार को तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसमें उन्हें दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराया गया था।
सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच के सामने यह मामला रखा और इसे जल्द सुनवाई के लिए लिस्ट करने की मांग की।
रोहतगी ने कहा, "हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक विधायक को अयोग्य घोषित कर दिया। यह पार्टी के कहने पर नहीं, बल्कि किसी और के कहने पर हुआ, जिसका कहना है कि विधायक की पार्टी की राजनीतिक सदस्यता खत्म हो गई है। मैं कल सुनवाई की मांग कर रहा हूं।"
उन्होंने बताया कि यह मामला दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) से जुड़ा है और स्पीकर ने अयोग्यता की अर्जी खारिज कर दी थी, लेकिन बाद में हाई कोर्ट ने उस फैसले को पलट दिया।
रोहतगी ने इस बात पर भी चिंता जताई कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद उपचुनाव का नोटिफिकेशन जारी किया जा सकता है।
इन दलीलों पर गौर करते हुए CJI कांत ने कहा कि मामले को बुधवार (23 सितंबर) को लिस्ट किया जाएगा।
नागेंद्र को तेलंगाना विधानसभा में खैराताबाद से भारत राष्ट्र समिति (BRS) के टिकट पर चुना गया था। बाद में वे कांग्रेस में शामिल हो गए और 2024 का लोकसभा चुनाव सिकंदराबाद से कांग्रेस के टिकट पर लड़ा।
इसके बाद, BJP नेता अलेटी महेश्वर रेड्डी और BRS विधायक पाडी कौशिक रेड्डी ने तेलंगाना हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने स्पीकर के नागेंद्र को अयोग्य न ठहराने के फैसले को चुनौती देते हुए, दलबदल विरोधी कानून के तहत उन्हें अयोग्य घोषित करने की मांग की।
जुलाई 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना विधानसभा स्पीकर को निर्देश दिया था कि वे नागेंद्र और दो अन्य विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर तीन महीने के भीतर फैसला लें।
इसके बाद स्पीकर ने नागेंद्र के खिलाफ अयोग्यता याचिका को खारिज कर दिया, जिसके कारण याचिकाकर्ता दोबारा हाई कोर्ट गए।
18 सितंबर को, तेलंगाना हाई कोर्ट ने स्पीकर के फैसले को रद्द कर दिया और नागेंद्र को विधानसभा से अयोग्य घोषित कर दिया।
साथ ही, कोर्ट ने खैराताबाद सीट को खाली घोषित कर दिया और उस निर्वाचन क्षेत्र में नए चुनाव कराने का निर्देश दिया।
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Telangana MLA Danam Nagender moves Supreme Court against disqualification under anti-defection law