

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के 'विशेष सघन पुनरीक्षण' (SIR) के दौरान महाराष्ट्र की मतदाता सूची से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले की सुनवाई 26 अक्टूबर को करने के लिए सहमत हो गई।
इस मामले में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने अदालत को बताया कि महाराष्ट्र के 9.79 करोड़ मतदाताओं में से 1.2 करोड़ मतदाताओं के डेटा में कुछ तार्किक विसंगतियां (logical discrepancies) पाई गई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पुणे और कुछ अन्य क्षेत्रों में 40.6% मतदाता मतदाता सूची से छूट गए हैं।
दातार ने अनुरोध किया कि इस मामले की सुनवाई आज अदालत के समक्ष सूचीबद्ध अन्य SIR मामलों के साथ की जाए।
हालांकि, CJI कांत ने जवाब दिया,
"इसे सामान्य तौर पर नहीं देखा जा सकता। हमें इसे राज्य-वार देखना होगा। हमें महाराष्ट्र पर ध्यान केंद्रित करना होगा। उसके बाद, हमें फिर से दिल्ली से जुड़े मुद्दों पर आना होगा।"
दातार ने कोर्ट से आग्रह किया कि गुरुवार को ही नोटिस जारी कर दिया जाए, ताकि अगली सुनवाई से पहले अधिकारी कथित विसंगतियों के बारे में जानकारी दे सकें।
उन्होंने कहा, "अगर आज नोटिस जारी हो जाता है, तो 26 अक्टूबर तक हमें तार्किक विसंगतियों (logical discrepancies) पर कुछ फीडबैक मिल सकता है। हमें तो यह भी नहीं पता कि तार्किक विसंगति क्या होती है। मैं इसे कोर्ट पर छोड़ता हूँ। वहाँ बस कुछ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) हैं।"
हालाँकि, CJI कांत ने तुरंत नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा, "आज नहीं। आज नहीं।"
यह सुनवाई दिल्ली में 'एसआईआर' (SIR) प्रक्रिया को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच हो रही है। सुप्रीम कोर्ट में दायर एक अलग याचिका में, आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और एक अन्य याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग (ECI) की उस शर्त को चुनौती दी है, जिसके तहत दिल्ली की मतदाता सूची के ड्राफ्ट से बाहर किए गए लोगों को अपना नाम फिर से जुड़वाने के लिए 'फॉर्म 6' का इस्तेमाल करके नए सिरे से आवेदन करना होगा।
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