

केरल की एक सत्र अदालत ने सोमवार को फैसला किया कि मर्सिडीज-बेंज कार चलाकर एक स्कूटर सवार की जान लेने के आरोपी नाबालिग को मिली जमानत के खिलाफ दायर अपीलों की सुनवाई बंद कमरे में (इन-कैमरा) की जाएगी।
17 वर्षीय आरोपी, जो एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश का बेटा है, 25 अक्टूबर की तड़के कोच्चि के चेरानाल्लूर में मर्सिडीज-बेंज कार चला रहा था। इस दौरान उसने एक दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी, जिससे स्कूटर सवार जयबालकृष्णन की मौत हो गई।
एर्नाकुलम की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कविता गंगाधरन ने शनिवार को पुलिस की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सोशल मीडिया पर उन पोस्ट के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, जिनमें नाबालिग की पहचान उजागर की गई थी।
किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 74 के तहत, कानून के दायरे में आए किसी बच्चे (CCL) की पहचान उजागर करना मना है, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी से इसकी अनुमति न ली गई हो।
इसलिए, अदालत ने साइबर पुलिस को निर्देश दिया कि वे उन सभी पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई करें, जिनमें किशोर की पहचान उजागर की गई थी।
आज, जब नाबालिग को मिली जमानत के खिलाफ राज्य और पीड़ित परिवार की ओर से दायर अपीलों पर सुनवाई हुई, तो अदालत ने 'इन-कैमरा' (बंद कमरे में) सुनवाई जारी रखने का फैसला किया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि कानून के दायरे में आए बच्चे (CCL) की निजता को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।
आरोपी किशोर पर शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 281 और 106(1) के तहत लापरवाही से गाड़ी चलाने और लापरवाही के कारण मौत का कारण बनने के अपराधों के लिए मामला दर्ज किया गया था। किशोर न्याय बोर्ड (JJB) ने 26 अक्टूबर को आरोपी किशोर को जमानत दे दी थी।
पीड़ित के परिवार और स्थानीय निवासियों के लगातार विरोध के बाद, पुलिस ने इसमें और भी गंभीर अपराध जोड़े। इनमें BNS की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या, जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती) के साथ-साथ मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (MVA) की धारा 181, 183, 199A(1) और 199A(2) शामिल हैं।
FIR में किशोर के पिता को भी सह-आरोपी बनाया गया है। वे एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश हैं, जो वर्तमान में त्रिशूर जिले के इरिंजालकुडा में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में तैनात हैं।
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