एलएलएटी बनाम सीएलएटी: एनएलयू कंसोर्टियम ने एनएलएसआईयू से अलग प्रवेश परीक्षा कराने के प्रस्ताव पर पुन:विचार का अनुरोध किया

कंसोर्टियम ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि एनएलएसआईयू अपने निर्णय पर पुन:विचार नहीं करेगी तो वह सीएलएटी से संबद्ध नहीं रह सकती
Vice-Chancellors of the NLU Consortium
Vice-Chancellors of the NLU Consortium

नेशनल लॉ यूनिवसिर्टीज के कंसोर्टियम की आज संपन्न बैठक में सर्वसम्मति से नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू), बैंगलोर से कहा कि वह इस साल अलग से प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के अपने फैसले पर पुन: विचार करे।

एनएलआईयू, भोपाल के कुलपति प्रो वी. विजयकुमार की अध्यक्षता में बैठक के दौरान यह प्रस्ताव पारित किया गया कि एनएलएसआईयू कंसोर्टियम के बाईलॉज के नियम 15.3.3 का उल्लंघन कर रही है। इस नियम के अनुसार कंसोर्टियम के सारे सदस्य (22 नेशनल लॉ यूनिवसिर्टीज) सीएलएटी के माध्यम से ही छात्रों को प्रवेश देने के लिये बाध्य हैं।

कंसोर्टियम- सीएलएटी के आयोजन के लिये जिम्मेदार है- ने चेतावनी दी है कि अगर एनएलएसआईयू अपने फैसले पर पुन:विचार नहीं करेगा तो वह सीएलएटी से संबंद्ध नहीं रह सकता हैं। कंसोर्टियम ने इस संबंध में एक बयान जारी किया है।

‘‘संचालक मण्डल ने यह भी संकल्प किया कि अगर एनएलएसआईयू अपने फैसले पर कायम रहता है, एनएलएसआईयू किसी भी रूप में सीएलएटी-2020 से संबद्ध नहीं रहेगा और सारे वित्तीय ओर प्रशासनिक फैसले सीएलएटी-2020 के संयोजक प्रो. बलराज चौहान द्वारा लिये जायेंगे और कंसोर्टियम का सचिवालय एनएलएसआईयू से बाहर ले जाया जा सकता है।’’

अब देखना यह है कि क्या एनएलएसआईयू अलग से प्रवेश परीक्षा एनएलएटी के अपने निर्णय पर कायम रहता है। प्रो. सुधीर कृष्णास्वामी, कुलपति ने आज प्रकाशित इंटरव्यू में यह कदम उठाने के पीछे की वजह स्पष्ट की है। उन्होंने कहा,

‘‘हमने महसूस किया कि हम एक संकट का सामना कर रहे हैं जब सितंबर तक भी अपने प्रवेश का काम पूरा नहीं कर सकते। और इसका मतलब होगा कि शैक्षणिक सत्र ही खतरे में पड़ जायेगा क्योंकि हम त्रैमासिक सेमेस्टर पर आधारित अकेली नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी हैं। हमारे पास विकल्प था कि इस साल छात्रों को बिल्कुल प्रवेश नहीं दें या कुछ तर्कसंगत तरीके के साथ आगे बढ़े और अलग से परीक्षा आयोजित करें। हमने दूसरा विकल्प चुना।

ईमानदारी से कहें, हम संभवत: सिर बाहर निकालने वाले पहले होंगे, लेकिन दूसरे विश्वविद्यालय भी हैं जो विकट स्थिति में है। हम अकेली यूनिवर्सिटी नहीं है जो ऐसा सोच रही है। हम कंसोर्टियम के साथ रचनात्मक तरीके से बातचीत करेंगे। हम समझते हैं कि इनमे से अनेक चीजों को बहुत ही आसानी से हल किया जा सकता है।’’

एनएलएसआईयू द्वारा इस साल प्रवेश के लिये अलग से एलएएलटी प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की घोषणा ने आक्रोष भड़का दिया। महामारी के बीच कम समय में एक अतिरिक्त परीक्षा में लिखने की सोच कर छात्रों की अपनी चिंतायें थीं।

एनएलयू कसोर्टियम ने भी इस घटनाक्रम को सहजता से नहीं लिया है। इस संस्था की कार्यकारी परिषद के सदस्यों (प्रो कृष्णास्वामी के अलावा) ने कल रात ही इस स्थिति पर विचार के लिये बैठक बुलाई। सीएलएटी-2020 के संयोजक प्रो. बलराज चौहान द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार परिषद की राय है कि एनएलएसआईयू का फैसला कंसोर्टियम के बाईलॉज के खिलाफ है। इस विज्ञप्ति में कहा गया है,

‘‘परिषद ने निराशा के साथ इसका संज्ञान लिया कि एनएलएसआईयू कंसोर्टियम में बने रहते हुये अपनी अलग से प्रवेश परीक्षा आयोजित करना चाहती है जिसकी कंसोर्टियम के बाईलॉज के अंतर्गत अनुमति नहीं है। वैसे भी कोविड-19 स्वास्थ आपात स्थिति के दौरान यह नयी प्रवेश परीक्षा हजारों छात्रों के लिये बहुत ही असुविधा पैदा करेगी जिन्हें अब एक की बजाये दो परीक्षाओं में शामिल होना पड़ेगा।’’

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[Breaking] NLAT v. CLAT: NLU Consortium asks NLSIU to reconsider move to hold separate entrance exam

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