प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित रेस कोर्स मस्जिद को गिराने की कोई तत्काल योजना नहीं: केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा

सरकारी वकील ने बताया कि सुरक्षा कारणों से मस्जिद की पानी और बिजली की आपूर्ति रोक दी गई थी, क्योंकि आस-पास के अन्य ढांचों को गिराने का काम चल रहा था।
Delhi High Court
Delhi High Court
Published on: 
2 min read

केंद्र सरकार ने मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित रेस कोर्स मस्जिद को गिराने की कोई तत्काल योजना नहीं है।

केंद्र सरकार के स्थायी वकील (CGSC) आशीष दीक्षित ने जस्टिस अनीश दयाल से कहा, "फिलहाल, हम [अधिकारी] किसी भी चीज़ को नहीं गिरा रहे हैं।"

दीक्षित ने बताया कि सुरक्षा कारणों से मस्जिद तक जाने का रास्ता बंद कर दिया गया है और वहां पानी व बिजली की आपूर्ति भी रोक दी गई है, क्योंकि आस-पास के कुछ अन्य ढांचों को गिराने का काम चल रहा है।

कोर्ट के इस सवाल पर कि क्या यह मान लिया जाए कि सरकार अगले कुछ दिनों तक इस ढांचे को नहीं गिराएगी, दीक्षित ने कहा कि भले ही इस बयान को आधिकारिक तौर पर दर्ज न किया जाए, लेकिन वे कोर्ट के एक अधिकारी के तौर पर यह बात कह रहे हैं।

Justice Anish Dayal
Justice Anish Dayal

जस्टिस दयाल ने इस मामले में नोटिस जारी किया और केस को आगे की सुनवाई के लिए 29 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया।

अदालत ने दीक्षित और दिल्ली वक्फ बोर्ड की ओर से पेश वकील से इस मामले में निर्देश लेने को कहा।

अदालत सैयद अहमद सऊद द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नमाजियों को मस्जिद में जाने से रोका जा रहा है। उन्होंने मांग की कि नमाजियों को मस्जिद में प्रवेश करने की अनुमति दी जाए और मस्जिद को तोड़े जाने से बचाने के लिए सुरक्षा प्रदान की जाए।

याचिकाकर्ता ने मस्जिद में प्रवेश रोके जाने को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि ये पाबंदियां संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत उनके धर्म पालन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती हैं।

सऊद के अनुसार, यह मस्जिद 150 साल से भी पुरानी है और 1977 में इसे वक्फ संपत्ति के रूप में अधिसूचित किया गया था। उनका यह भी दावा है कि दिल्ली सरकार द्वारा 2009 में जारी एक अधिसूचना के तहत, इस ढांचे को 'ग्रेड-II हेरिटेज' (विरासत) का दर्जा प्राप्त है।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि 7 अक्टूबर को, जब आसपास की झुग्गी-बस्तियों को हटाने (ध्वस्तीकरण अभियान) का काम चल रहा था, तब मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी गई। उन्होंने दावा किया कि जिन अतिक्रमणों को हटाए जाने की सूची थी, उसमें यह मस्जिद शामिल नहीं थी।

इसके अलावा, याचिका में कहा गया है कि 17 अक्टूबर को भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) के एक अधिकारी पुलिसकर्मियों के साथ मस्जिद पहुंचे और कथित तौर पर कहा कि इसे दो से चार दिनों के भीतर तोड़ दिया जाएगा।

यह याचिका वकील एम. सुफियान सिद्दीकी के माध्यम से दायर की गई है।

और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें


No immediate plan to demolish Race Court Masjid near PM's residence: Centre to Delhi High Court

Hindi Bar & Bench
hindi.barandbench.com