

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) को नोटिस जारी किया। यह नोटिस पंजाब सरकार और ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) की उस याचिका पर जारी किया गया है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान एजेंसी द्वारा ज़ब्त किए गए दस्तावेज़ों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को वापस करने की मांग की गई थी।
चीफ़ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी किया और मामले को दो हफ़्ते बाद के लिए लिस्ट किया।
कोर्ट ने आदेश दिया, "इसे 28 तारीख के लिए तय करें।"
ED ने पिछले महीने मोहाली और उसके आस-पास रिहायशी और कमर्शियल प्रॉपर्टी के डेवलपमेंट का काम करने वाली संस्था GMADA के ठिकानों पर छापा मारा था। यह छापा तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले के सिलसिले में मारा गया था।
इस प्राइवेट कंपनी के खिलाफ ED की जांच की वजह से GMADA के कई ज़मीन सौदे जांच के दायरे में आ गए हैं। GMADA ऑफिस में तलाशी के बाद, ED ने कहा कि दिल्ली के पूर्व मंत्री मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन, मास्टर प्लान, नई नीलामी, ज़मीन अधिग्रहण और मुआवज़े पर चर्चा करने के लिए GMADA अधिकारियों के साथ नियमित रूप से "अनौपचारिक" बैठकें करते थे।
पंजाब में सत्ता में मौजूद आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने वरिष्ठ नेताओं पर लगे आरोपों से इनकार किया है।
GMADA और पंजाब सरकार ने अब तलाशी और ज़ब्ती की कार्रवाई के लिए मिले अधिकार को रद्द करने की मांग करते हुए कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। उन्होंने उन रिकॉर्ड्स को वापस करने की भी मांग की है, जिनमें कथित तौर पर दस्तावेज़ों के 30 बैग, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क ड्राइव, सर्वर और अन्य डिवाइस शामिल हैं।
याचिका में यह घोषणा करने की भी मांग की गई है कि GMADA मुख्यालय का सर्वे और तलाशी अधिकार क्षेत्र से बाहर थी। सरकार ने यह घोषणा करने की भी मांग की है कि PMLA की धारा 16 और 17 किसी राज्य के वैधानिक प्राधिकरण के परिसर को सील करने या किसी व्यक्ति को ऑफिस के समय के बाद भी परिसर में रहने के लिए मजबूर करने की कोई शक्ति नहीं देती हैं।
GMADA का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील विक्रम चौधरी ने आज कहा कि यह प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों का खुला दुरुपयोग है।
उन्होंने दावा किया कि ED द्वारा की गई तलाशी के दौरान वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को "दो रातों तक हिरासत में" रखा गया था।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने कहा कि अधिकारियों ने खुद हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त वारंट अधिकारी को बताया था कि तलाशी के दौरान उन्हें ED ने हिरासत में नहीं लिया था।
जैन ने कहा, "सब कुछ कानून के अनुसार किया गया।"
जैन ने यह भी कहा कि GMADA याचिका दायर नहीं कर सकता था क्योंकि उसे इस मामले में चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है।
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P&H High Court seeks ED's response on Punjab government's plea challenging raid at GMADA office