

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक नाबालिग लड़की की मॉर्फ्ड तस्वीर अपलोड करने के आरोपी व्यक्ति पर तीन साल तक सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से रोक लगा दी है [तुलसा राम उर्फ़ तुषार बनाम राजस्थान राज्य]।
जस्टिस अशोक कुमार जैन ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 77 के तहत दर्ज 'वॉयरिज्म' (चुपके से देखने या तांक-झांक करने) के मामले में आरोपी को ज़मानत देते हुए यह निर्देश दिया।
6 जुलाई को जारी आदेश में कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल किया था, इसलिए उसे सबक सिखाने के लिए कम से कम तीन साल तक इन प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करने से रोकना सही होगा।
कोर्ट ने निर्देश दिया, "आरोपी को ट्रायल कोर्ट के सामने एक हलफ़नामा या अंडरटेकिंग देनी होगी कि वह तीन साल तक Facebook, Instagram, Threads, Snapchat वगैरह जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल नहीं करेगा। अगर यह पाया जाता है कि आरोपी अपने असली नाम या किसी फ़र्ज़ी नाम से किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल कर रहा है, तो ट्रायल कोर्ट उसकी ज़मानत का आदेश रद्द कर सकता है।"
आरोपी को 12 फरवरी को दर्ज एक मामले में 2 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। आरोपी का दावा था कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उसके वकील ने कहा कि वह 2 अप्रैल से जेल में है और जमानत देने की अपील की।
आरोपी के वकील ने यह भी कहा कि अगर कोर्ट को लगता है कि उसने सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल किया है, तो उसे सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से रोका जा सकता है।
यह देखते हुए कि आरोपी काफी समय से हिरासत में है और मुकदमे के जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है, कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी।
याचिकाकर्ता की ओर से वकील विक्रम सिंह जैतावत पेश हुए।
सरकारी वकील नरेंद्र कुमार गहलोत, साथ ही वकील ओम प्रकाश चौधरी और अवर दान उज्ज्वल ने राज्य और शिकायतकर्ता का पक्ष रखा।
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Rajasthan High Court orders social media ban for man accused of uploading morphed image of minor