

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सिक्किम हाईकोर्ट के कर्मचारियों द्वारा दायर एक याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इस याचिका में कर्मचारियों ने हाईकोर्ट द्वारा अपनी सेवा समाप्त किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ता के वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष इस मामले का ज़िक्र किया और इस बात पर चिंता जताई कि क्या हाईकोर्ट की पूरी पीठ, पिछले मुख्य न्यायाधीश के कार्यकाल में की गई नियुक्तियों को रद्द कर सकती है।
वकील ने मामले की तत्काल सुनवाई का भी आग्रह किया, लेकिन कोर्ट ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और कहा कि मामले की सुनवाई उचित समय पर की जाएगी।
पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, "इस कोर्ट को अपनी सुविधा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एक मंच के तौर पर देखा जाता है।"
यह विवाद सिक्किम हाईकोर्ट के एक 'फुल कोर्ट' (पूर्ण पीठ) के फ़ैसले से शुरू हुआ, जिसमें उन याचिकाकर्ताओं की सेवाएँ समाप्त कर दी गई थीं, जिनकी नियुक्ति एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश के कार्यकाल के दौरान हुई थी।
कर्मचारियों की ओर से पेश होते हुए वकील ने आज सुप्रीम कोर्ट से कहा,
“यह कोई साधारण मामला नहीं है। इन सभी कर्मचारियों को पिछले मुख्य न्यायाधीश ने सेवा में लिया था।”
उन्होंने यह तर्क भी दिया कि उनकी सेवा समाप्ति का फ़ैसला बाद में आए एक 'फुल कोर्ट' के फ़ैसले के आधार पर लिया गया था।
वकील ने कहा, “अब उन्हें सेवा से हटाने के लिए 'फुल कोर्ट' के फ़ैसले का हवाला दिया जा रहा है।”
इस मामले के व्यापक प्रभावों पर ज़ोर देते हुए वकील ने कहा,
“यहाँ एक बड़ा मुद्दा इस संस्था से जुड़ा हुआ है। प्रस्ताव में कहा गया है कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश के पास पद सृजित करने का अधिकार नहीं था। जबकि, उनके पास यह अधिकार था।”
हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की तत्काल सुनवाई (अर्जेंट लिस्टिंग) के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया, और CJI कांत ने कहा,
“वैसे भी, इसकी तत्काल सुनवाई नहीं होगी। जब हम इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेंगे, तब हम इन सभी बातों को सुनेंगे।”
अब इस मामले पर उचित समय आने पर सुनवाई की जाएगी।
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Sikkim High Court employees move Supreme Court against termination