सुप्रीम कोर्ट विरोध प्रदर्शनों के दौरान ज़रूरी सेवाओं में रुकावट से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हुआ

कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस याचिका को विरोध-प्रदर्शनों, रैलियों और सभाओं के लिए जगह से जुड़े एक अन्य मामले के साथ जोड़ा जाए।
CJP protest
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह विरोध-प्रदर्शनों या हड़तालों के दौरान ज़रूरी सेवाओं में रुकावट से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करेगा।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने निर्देश दिया कि इस याचिका को विरोध-प्रदर्शन, रैलियों और सभाओं के लिए जगह से जुड़े एक दूसरे मामले के साथ जोड़ा जाए।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, "जब विरोध-प्रदर्शन होते हैं, तो ज़रूरी सेवाएँ बाधित होती हैं। हमें नहीं पता कि कौन प्रदर्शनकारी है और कौन नहीं। आने-जाने का रास्ता पूरी तरह से बाधित हो जाता है।"

CJI कांत ने कहा, "हमारे पास पहले से ही विरोध-प्रदर्शन, रैलियों और ऐसी सभाओं के लिए जगह से जुड़ा एक मामला लंबित है। इस याचिका को उस मामले के साथ जोड़ा जाए। लेकिन हमें बताएँ, हम इस तरह का निर्देश कैसे जारी कर सकते हैं? हम इस मामले की सुनवाई करेंगे।"

दिल्ली के जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन और सभाओं की जगह के तौर पर इस्तेमाल करने को लेकर शीर्ष अदालत में पहले से ही एक याचिका लंबित है।

उस याचिका में कहा गया है कि सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चिंताओं के कारण जंतर-मंतर अब सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त जगह नहीं है।

यह याचिका हाल ही में हुए छात्र विरोध-प्रदर्शनों के बाद दायर की गई थी। ये प्रदर्शन जून में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नाम के ऑनलाइन समूह के आह्वान पर शुरू हुए थे, जिसमें बार-बार प्रश्न-पत्र लीक होने के कारण तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की माँग की गई थी। इन विरोध-प्रदर्शनों का समापन 20 जुलाई को संसद की ओर 'संसद चलो' मार्च के साथ हुआ।

याचिका में ऐसे विरोध-प्रदर्शनों के लिए कोई वैकल्पिक जगह तय करने का निर्देश देने की माँग की गई है।

जब 3 अगस्त को उस याचिका पर सुनवाई हुई थी, तो अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मुद्दे पर निर्देश लेने को कहा था।

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Supreme Court agrees to hear plea flagging disruption of essential services during protests

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