

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को डोंबिवली में डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों पर हमले के मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को मिली ज़मानत रद्द कर दी [रमेश सुक्रिया म्हात्रे बनाम बॉम्बे हाई कोर्ट]।
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने यह आदेश पारित किया।
म्हात्रे को जुलाई में कल्याण-डोंबिवली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (KDMC) के शास्त्री नगर अस्पताल में 6 जुलाई को डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
हालांकि एक सेशन कोर्ट ने उन्हें 14 जुलाई को ज़मानत दे दी थी, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया और शनिवार, 18 जुलाई को हुई एक विशेष सुनवाई के बाद ज़मानत के आदेश पर रोक लगा दी।
7 अगस्त को हाई कोर्ट ने रोक हटा दी और कड़ी शर्तों के साथ म्हात्रे को रिहा करने का आदेश दिया। हाई कोर्ट ने मामले को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में भी ट्रांसफर कर दिया और जांच पूरी करने, चार्जशीट दाखिल करने और ट्रायल आगे बढ़ाने के लिए समय-सीमा तय कर दी।
म्हात्रे ने उन पर लगाई गई कड़ी शर्तों को लेकर हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
राज्य सरकार ने भी ज़मानत को चुनौती देते हुए अलग से अपील दायर की।
7 सितंबर को, जब सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत रद्द करने का संकेत दिया, तो म्हात्रे ने अपनी अपील वापस ले ली।
कोर्ट ने महाराष्ट्र में डॉक्टरों पर बार-बार हो रहे हमलों पर भी नाराज़गी जताई और कहा कि ऐसे हमलों के पीछे "एक ही विचारधारा" के लोग हैं; यह टिप्पणी शिवसेना कार्यकर्ताओं द्वारा डॉक्टरों के साथ मारपीट की एक अलग घटना के संदर्भ में की गई थी।
कोर्ट ने उसी दिन राज्य की अपील पर नोटिस जारी किया और म्हात्रे से अपना जवाब दाखिल करने को कहा।
इसके बाद कोर्ट ने आज म्हात्रे की ज़मानत रद्द करने से पहले मामले की सुनवाई की।
वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे म्हात्रे की ओर से पेश हुए।
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Supreme Court cancels Shiv Sena corporator Ramesh Mhatre’s bail in doctors' assault case