VD सावरकर पर क्विज़ सवाल के लिए सस्पेंड किए गए टीचर ने राहत के लिए केरल हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया

कोर्ट ने आज मौखिक रूप से कहा, "सवाल यह है कि क्या ऐसे मामले में सस्पेंशन होना चाहिए।"
Vinayak Savarkar
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केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार से एक स्कूल टीचर की याचिका पर जवाब मांगा। टीचर ने एक क्विज़ सवाल को लेकर अपने सस्पेंशन को चुनौती दी थी; इस सवाल में वीडी सावरकर को एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर बताया गया था जिन्हें अंग्रेजों से सबसे ज़्यादा सज़ा मिली थी।

यह याचिका गुरुप्रसाद राय के. ने दायर की है, जिन्होंने वह सवाल तैयार किया था। राय ने कोर्ट से गुज़ारिश की है कि उनके सस्पेंशन ऑर्डर को रद्द किया जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि जब तक कोर्ट उनकी याचिका पर फ़ैसला नहीं ले लेता, तब तक सस्पेंशन ऑर्डर पर रोक लगाई जाए।

जस्टिस विजू अब्राहम ने आज इस मामले पर थोड़ी देर सुनवाई की और राज्य के वकील से निर्देश लेने को कहा।

सुनवाई के दौरान जस्टिस विजू अब्राहम ने पूछा, "सवाल यह है कि क्या ऐसे मामले में सस्पेंशन होना चाहिए... आप अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रख सकते हैं... लेकिन क्या (ऐसे मामलों में) सस्पेंशन कोई सज़ा हो सकती है?"

इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "सरकारी वकील कोर्ट को उन खास वजहों के बारे में बताएंगे जिनकी वजह से याचिकाकर्ता को सस्पेंड किया गया था।"

Justice Viju Abraham
Justice Viju Abraham

यह मामला एक स्कूल क्विज़ के सवाल से जुड़े विवाद से जुड़ा है, जिसमें वीडी सावरकर की तारीफ़ करते हुए उन्हें ऐसा स्वतंत्रता सेनानी बताया गया था जिन्हें अंग्रेज़ों से "सबसे कठोर सज़ा" मिली थी।

बताया जाता है कि यह सवाल कासरगोड में स्कूल-लेवल की एक लोकल क्विज़ के लिए तैयार किया गया था। सवाल था, "वह कौन सा स्वतंत्रता सेनानी था जिसे अंग्रेज़ों से सबसे ज़्यादा सज़ा मिली थी?"

इसका जवाब वीडी सावरकर बताया गया था। बाद में राज्य के शिक्षा मंत्री ने इसे इतिहास को जानबूझकर गलत तरीके से पेश करना बताया।

सवाल तैयार करने वाले स्कूल टीचर को 9 अगस्त को सस्पेंड कर दिया गया था। अब उन्होंने इस फ़ैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है।

टीचर की याचिका में कहा गया है कि उन्हें सस्पेंड करने का आदेश शिक्षा मंत्री के ज़ुबानी निर्देशों पर और संबंधित नियमों का उल्लंघन करते हुए दिया गया था।

याचिका में आगे कहा गया है, "किसी एक मंत्री के फ़ैसले को राज्य सरकार का फ़ैसला नहीं माना जा सकता। मंत्री के फ़ैसले के आधार पर जारी किए गए Ext P2 (सस्पेंशन का निर्देश देने वाला पत्र) और P3 (सस्पेंशन ऑर्डर) बिज़नेस नियमों का उल्लंघन करते हैं, इसलिए वे शुरू से ही अमान्य हैं और उनके आधार पर की गई सभी कार्रवाई भी अमान्य और बेकार हैं।"

राय (टीचर) का यह भी कहना है कि सवाल और जवाब में तथ्यों के हिसाब से कोई गलती नहीं थी, और उन्हें सिर्फ़ इसलिए सस्पेंड किया गया क्योंकि समाज के एक वर्ग को वह जवाब पसंद नहीं आया।

राय की याचिका में कहा गया है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली भारत सरकार ने मई 1970 में सावरकर के सम्मान में एक यादगार डाक टिकट भी जारी किया था।

इसलिए, उन्होंने अपने सस्पेंशन को राजनीतिक रूप से प्रेरित और रद्द किए जाने योग्य बताते हुए चुनौती दी है। यह याचिका M/s लॉयर एंड लॉयर के वकील KS भरथन, आदित्यन S मन्नाली, रोनित ज़कारिया, सगीथ कुमार V, हेमंत H और S कृष्णा के ज़रिए दायर की गई है।

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