

थान्या नाथन केरल की ज्यूडिशियरी परीक्षा पास करने वाली पहली दृष्टिबाधित व्यक्ति बन गई हैं।
नाथन ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा में दिव्यांगों की लिस्ट में पहला स्थान हासिल किया।
100% दृष्टिबाधित उम्मीदवार ने कन्नूर यूनिवर्सिटी से LLB में फर्स्ट रैंक के साथ ग्रेजुएशन किया।
न्यायिक परीक्षाओं में हाथ आजमाने का फैसला करने से पहले उन्होंने कन्नूर जिले के तालिपारम्बा में एक वकील के तौर पर प्रैक्टिस की।
नाथन की यह जीत सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले के एक साल से भी कम समय बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि दृष्टिबाधित उम्मीदवार भारत में न्यायिक सेवाओं में नियुक्ति के लिए योग्य हैं।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने मार्च 2025 में कई याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया, जिसमें कुछ राज्यों की न्यायिक सेवाओं में ऐसे उम्मीदवारों को आरक्षण न देने से जुड़ा एक स्वतः संज्ञान मामला भी शामिल था।
कोर्ट ने कहा कि दिव्यांगों को न्यायिक सेवाओं में किसी भी तरह के भेदभाव का सामना नहीं करना चाहिए और राज्य को एक समावेशी ढांचा प्रदान करने के लिए सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया है, "किसी भी उम्मीदवार को सिर्फ़ दिव्यांगता के कारण ऐसे अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता।"
और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें
Thanya Nathan to serve as first visually challenged judge in Kerala