“यह मामला अभिशप्त है”: कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़ी याचिका में बार-बार सुनवाई टलने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

बेंच ने यह टिप्पणी तब की जब उसे बताया गया कि कोर्ट में मौजूद वादी इलाहाबाद हाई कोर्ट में मुख्य वादी के तौर पर किसी एक व्यक्ति पर सहमति नहीं बना पाए।
Krishna Janmabhumi - Shahi Idgah Dispute
Krishna Janmabhumi - Shahi Idgah Dispute
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े मामले में बार-बार सुनवाई टलने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला "मनहूस" (jinxed) है।

जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें एक हिंदू पक्ष को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि माना गया था।

कोर्ट ने कहा, "हमें आप सभी की बात सुननी होगी। इस मामले के साथ कुछ ऐसा ही है कि यह आगे नहीं बढ़ पा रहा है। एक के बाद एक तारीख पर सुनवाई टलती जा रही है..."

बेंच ने यह टिप्पणी तब की जब उन्हें बताया गया कि हाई कोर्ट में केस करने वाले पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुँच पाए हैं। इससे पहले, हिंदू पक्ष के भीतर चल रहे विवाद को सुलझाने की संभावना जताई गई थी।

Justices Sanjay Kumar and Sanjeev Sachdeva (supreme court judges)
Justices Sanjay Kumar and Sanjeev Sachdeva (supreme court judges)

कोर्ट ने कहा कि वह मामले के गुण-दोष के आधार पर पक्षों की दलीलें सुनेगा। हालांकि, समय की कमी के कारण, सुनवाई के लिए याचिका को 6 नवंबर तक के लिए टाल दिया गया।इस ढांचे को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब हिंदू पक्ष (वादी) ने सिविल कोर्ट में एक मुकदमा दायर किया। इसमें दावा किया गया कि शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कृष्ण जन्मभूमि की ज़मीन पर किया गया था।

यह सिविल मुकदमा हिंदू देवता भगवान श्री कृष्ण विराजमान और कुछ हिंदू श्रद्धालुओं की ओर से दायर किया गया था। वादियों ने मस्जिद को उसकी मौजूदा जगह से हटाने की मांग की।

वादियों ने यह भी दावा किया कि ऐसे कई संकेत हैं जिनसे यह साबित होता है कि शाही ईदगाह मस्जिद असल में एक हिंदू मंदिर है। इसलिए, जगह की जांच के लिए एक कमिश्नर नियुक्त करने की अर्ज़ी हाई कोर्ट में दी गई।

शुरुआत में, सितंबर 2020 में सिविल कोर्ट ने मुख्य मुकदमा खारिज कर दिया था। कोर्ट ने 'पूजा स्थल अधिनियम, 1991' (Places of Worship Act, 1991) के तहत मामला स्वीकार करने पर लगी रोक का हवाला दिया था।

हालांकि, मथुरा ज़िला अदालत में अपील के बाद इस फैसले को पलट दिया गया। मई 2022 में मथुरा ज़िला अदालत ने कहा कि मुकदमा सुनवाई योग्य है।

बाद में, 2023 में इस मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।

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This matter is jinxed: Supreme Court on repeated adjournments in Krishna Janmabhoomi-Shahi Idgah dispute plea

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