

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि अच्छी आर्थिक स्थिति वाले लोग अक्सर उन कानूनों की वैधता को चुनौती देते हैं जिनके तहत उन पर केस दर्ज किया गया है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने यह टिप्पणी दिल्ली के वकील गौतम खैतान की याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिन पर फिलहाल अगस्तावेस्टलैंड VVIP हेलीकॉप्टर डील के सिलसिले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं।
कोर्ट को बताया गया कि उन्होंने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती दी है।
खैतान की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने कहा, 0
जवाब में CJI कांत ने कहा, "यह अब एक नया चलन बन गया है कि जब ट्रायल चल रहा होता है... तो अमीर और प्रभावशाली लोग कानून की वैधता को चुनौती देने के लिए कोर्ट जाते हैं। किसी भी दूसरे नागरिक की तरह ट्रायल का सामना करें।"
कोर्ट ने आखिरकार याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया, यह देखते हुए कि कानूनी प्रावधानों को इसी तरह की चुनौती पहले से ही उसके सामने पेंडिंग है।
याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा, "कानून का सवाल उचित कार्यवाही में तय करने के लिए खुला रखा गया है। सुनवाई नहीं की गई क्योंकि इसी तरह की चुनौती पहले से पेंडिंग है।"
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