

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि बिना किसी ठोस वजह के पति के परिवार से अलग घर में रहने की पत्नी की मांग वैवाहिक क्रूरता मानी जाएगी, जिसके आधार पर पति तलाक ले सकता है।
यह फ़ैसला 29 जुलाई को जस्टिस सतीश निनन और पी. कृष्णा कुमार की बेंच ने सुनाया।
कोर्ट ने कहा, "बिना किसी ठोस वजह के पति के परिवार से अलग घर में रहने की मांग करना, अपने आप में क्रूरता है।"
यह फ़ैसला एक व्यक्ति की अपील पर सुनाया गया। उसने फ़ैमिली कोर्ट के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की थी, जिसमें हिंदू मैरिज एक्ट, 1956 की धारा 13(1)(ia) के तहत उसकी तलाक़ की अर्ज़ी को खारिज कर दिया गया था।
उस व्यक्ति और उसकी पत्नी की शादी 2015 में हुई थी, जब वह दुबई में काम कर रहा था। शादी के एक हफ़्ते बाद, वे दुबई चले गए और वहाँ किराए के घर में रहने लगे। पति के माता-पिता भी उनके साथ रहते थे।
पत्नी 2016 में अपनी प्रेग्नेंसी के आखिरी दौर में भारत में अपने माता-पिता के घर लौट आई। हालाँकि, बेटी के जन्म के बाद भी उसने दुबई लौटने से इनकार कर दिया।
पति के अनुसार, पत्नी ने उससे कहा कि वह तभी लौटेगी जब वह उसके माता-पिता के घर से अलग दो-बेडरूम का फ़्लैट ले। उसने यह भी आरोप लगाया कि शादी के दौरान पत्नी का व्यवहार क्रूरतापूर्ण था, जिसके आधार पर उसे तलाक़ मिलना चाहिए। इस संबंध में, उसने बताया कि पत्नी और उसके परिवार ने उसे बताए बिना बच्चे का नामकरण संस्कार किया था।
दूसरी ओर, पत्नी ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि एकमात्र समस्या यह थी कि उसकी सास उन्हें अच्छे संबंध बनाए रखने नहीं दे रही थी।
फ़ैमिली कोर्ट ने पति की तलाक़ की अर्ज़ी को खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि जोड़े के बीच कोई गंभीर विवाद नहीं था और पत्नी की एकमात्र शिकायत सास के दखल से जुड़ी थी।
इसके बाद हाईकोर्ट में अपील की गई।
हाईकोर्ट ने पाया कि पत्नी और उसके ससुर के बीच फ़ोन पर हुई बातचीत में उसने साफ़ तौर पर कहा था कि उसके और उसकी सास के बीच कोई समस्या नहीं है।
कोर्ट ने कहा, "हालाँकि प्रतिवादी (पत्नी) ने दलील दी कि याचिकाकर्ता और उसकी माँ ने उसके साथ बुरा बर्ताव किया था, लेकिन याचिकाकर्ता (पति) के पिता के साथ फ़ोन पर हुई बातचीत के बारे में उसकी स्वीकारोक्ति इस दावे को अविश्वसनीय बनाती है। इस प्रकार, अलग घर की माँग बिना किसी ठोस कारण या औचित्य के थी।"
कोर्ट ने यह भी गौर किया कि यह जोड़ा नौ साल से ज़्यादा समय से अलग रह रहा है। पति की तलाक की अपील को मंज़ूरी देते हुए कोर्ट ने कहा, "ऊपर हुई चर्चा से यह साफ़ है कि याचिकाकर्ता वैवाहिक क्रूरता के आधार पर तलाक की डिक्री के ज़रिए प्रतिवादी के साथ अपनी शादी खत्म करने का हकदार है।"
पति की ओर से वकील सी. लीना पेश हुईं। पत्नी की ओर से वकील टी.वी. जयकुमार नंबूदरी पेश हुए।
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Wife's demand to stay separately from husband's family without reason is cruelty: Kerala High Court