

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अगर कनॉट प्लेस के आसपास बार-बार होने वाले विरोध-प्रदर्शनों और सुरक्षा पाबंदियों से कारोबार पर असर पड़ता है, तो वह इसमें दखल देगा।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ एक मामले की सुनवाई कर रही थी। यह मामला नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) के उस फैसले से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को दो दिनों के लिए बंद करने का निर्णय लिया था। यह फैसला 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के उस विरोध-प्रदर्शन से पहले लिया गया था, जो पार्टी अपने गिरफ्तार नेताओं - सौरव दास और आशुतोष रांका - के समर्थन में करने वाली थी।
CJI कांत ने कहा, "कुछ कदम उठाने की जरूरत पड़ सकती है। कुछ निर्देश देने पड़ सकते हैं। हम जानते हैं कि छोटे दुकानदार, फेरीवाले और स्टॉल लगाने वाले लोग इन्हीं दिनों अपनी आजीविका कमाते हैं। और हमें यह भी पता है कि उनके पूरे परिवारों को किन मुश्किलों, कठिनाइयों और संकटों का सामना करना पड़ता है।"
अदालत ने यह टिप्पणी तब की, जब व्यापारियों की ओर से पेश वकील जय अनंत देहादराय ने एक मामले का जिक्र करते हुए बताया कि सेंट्रल दिल्ली में व्यापारियों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
देहादराय ने कहा, "हम किराना समिति की तरफ से हैं। कनॉट प्लेस में विरोध-प्रदर्शन आदि के कारण हर दिन ₹250 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो रहा है... और NDMC ने कल रात एक नोटिस जारी किया है। यह मामला बहुत जरूरी है।"
जस्टिस बागची ने अदालत में दायर की जा रही याचिकाओं की संख्या पर टिप्पणी की।
जज ने कहा, "यह मामला अलग है। कोई विरोध-प्रदर्शन करना चाहता है, कोई मूंगफली बेचना चाहता है, तो कोई कानून-व्यवस्था बनाए रखना चाहता है। ये सभी हमारे सामने हैं।"
देहादराय ने कहा कि आने वाले त्योहारों के सीजन को देखते हुए यह मामला काफी जरूरी है, इसलिए इसे जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। उन्होंने कहा कि NDMC द्वारा लगाई गई पाबंदी जरूरत से ज्यादा सख्त है।
उन्होंने कहा, "यह मामला बहुत जरूरी है क्योंकि करवा चौथ, दशहरा, दिवाली और छठ आने वाले हैं।"
जस्टिस बागची ने कहा कि अगर NDMC जैसी पाबंदियों से कारोबार पर असर पड़ता है, तो अदालत इसमें दखल देगी।
जज ने कहा, "अगर कारोबार बड़े पैमाने पर हो रहा है और आपके मुवक्किलों के लिए इसे गैर-कानूनी बना दिया जाता है, तो हम संवैधानिक कानून के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे।"
जब वकील ने अपनी बात फिर से दोहराई, तो अदालत ने कहा,
"हमने आपसे कहा है कि मुआवजे और पब्लिक लॉ (सार्वजनिक कानून) के तहत इस अदालत के पास पर्याप्त अधिकार क्षेत्र है। हम कार्रवाई करेंगे।"
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