वर्ली हिट-एंड-रन: मुंबई कोर्ट ने आरोपी पर गैर-इरादतन हत्या और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप तय किए

प्रथमदृष्टया ऐसे सबूत मौजूद है जिनसे पता चलता है मुख्य आरोपी मिहिर शाह की लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण कावेरी नखवा की मौत हुई साथ ही सबूतो से छेड़छाड़ के आरोप मे उसके पिता पर भी आरोप तय किए गए
Mumbai sessions court
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मुंबई की सेशंस कोर्ट ने 10 जून को 2024 के वर्ली BMW हिट-एंड-रन मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ आपराधिक आरोप तय किए। इन आरोपियों में 25 साल का मिहिर शाह, उसके पिता राजेश शाह और ड्राइवर राजऋषि राजेंद्रसिंह बिदावत शामिल हैं [महाराष्ट्र राज्य बनाम मिहिर शाह और अन्य]।

एडिशनल सेशंस जज अनिल डी सालुंखे ने राजेश शाह को बरी करने की अर्जी खारिज कर दी और कहा कि तीनों आरोपियों के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए शुरुआती सबूत मौजूद हैं।

कोर्ट को राजेश शाह के खिलाफ अपराध के सबूत मिटाने का आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत मिले; यह अपराध भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 238 के तहत दंडनीय है।

मिहिर शाह और सह-आरोपी ड्राइवर राजऋषि राजेंद्रसिंह बिदावत के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (BNS की धारा 105), लापरवाही से गाड़ी चलाने (धारा 281), लापरवाही से गंभीर चोट पहुंचाने (धारा 125(b)), शरारत/नुकसान पहुंचाने (धारा 324(4)) और सबूत मिटाने (धारा 238) के साथ-साथ मोटर व्हीकल एक्ट और उससे जुड़े नियमों के तहत आरोप तय किए गए।

यह मामला 7 जुलाई, 2024 को वर्ली में हुई एक घटना से जुड़ा है। आरोप है कि मिहिर शाह ने अपनी BMW लापरवाही से चलाई, जिससे प्रदीप नखवा और उनकी पत्नी कावेरी के स्कूटर को टक्कर लगी। कावेरी की मौत हो गई, जबकि नखवा घायल हो गए।

BNS, मोटर व्हीकल एक्ट और संबंधित नियमों के प्रावधानों के तहत FIR दर्ज की गई। बाद में BMW का पता लगाकर उसे ज़ब्त कर लिया गया और शाह समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

जांच के बाद, सेवरी मजिस्ट्रेट के सामने चार्जशीट दाखिल की गई।

इसके बाद मामले को सेशंस कोर्ट में भेजा गया क्योंकि BNS की धारा 105 के तहत गैर-इरादतन हत्या का अपराध केवल सेशंस कोर्ट द्वारा ही चलाया जा सकता है।

बचाव पक्ष ने राजेश शाह को बरी करने की मांग करते हुए तर्क दिया कि उन्होंने पुलिस का सहयोग किया था और सबूत नष्ट करने के लिए कुछ नहीं किया था।

अभियोजन पक्ष ने इस अर्जी का विरोध किया और आरोप लगाया कि यह जानते हुए भी कि मिहिर नशे में था और एक गंभीर अपराध हुआ है, राजेश ने उसे गिरफ्तारी और मेडिकल जांच से बचने में मदद की और सबूत मिटाने का काम किया।

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि मिहिर और बिदावत के खिलाफ मामले में ज़्यादा से ज़्यादा BNS की धारा 105 का दूसरा हिस्सा लागू होता है, जो ऐसे कामों से संबंधित है जिन्हें यह जानते हुए किया जाता है कि इनसे मौत हो सकती है, लेकिन मौत का इरादा नहीं होता।

कोर्ट ने CCTV फुटेज, गवाहों के बयानों और जिस तरह से कार चलाई गई थी, उन बातों के आधार पर यह नतीजा निकाला कि मौत का कारण बनने का इरादा या जानकारी होने का "गंभीर संदेह" था। यह संदेह मिहिर और बिदावत के खिलाफ 'गैर-इरादतन हत्या' (जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती) का आरोप लगाने के लिए काफी था।

कोर्ट को राजेश शाह के खिलाफ भी आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत मिले। उन पर अपराधी को बचाने के लिए सबूत मिटाने का आरोप है (BNS की धारा 238 के तहत)।

सभी आरोपियों की ओर से वकील नितिन सेजपाल पेश हुए। राज्य की ओर से एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अश्विनी रायकर पेश हुईं।

[आदेश पढ़ें]

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Worli hit‑and‑run: Mumbai court frames charges against accused for culpable homicide, evidence tampering

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