गुजरात एचसी ने वरिष्ठ अधिवक्ता यतिन ओझा का पदवी पुन: प्राप्त करने का माफीनामा ठुकराया, कहा ‘‘कागजी माफी से ज्यादा नही है’’

न्यायालय ने ओजा द्वारा अदालत की रजिस्ट्री के खिलाफ कतिपय आरोप लगाये जाने के बाद उनकी वरिष्ठ अधिवक्ता की पदवी वापस ले ली थी।
गुजरात एचसी ने वरिष्ठ अधिवक्ता यतिन ओझा का पदवी पुन: प्राप्त करने का माफीनामा ठुकराया, कहा ‘‘कागजी माफी से ज्यादा नही है’’
Yatin Oza

गुजरात उच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीशों की बैठक ने यतिन ओजा की बिना शर्त क्षमा याचना स्वीकार नहीं करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया है। यतिन ओजा की वरिष्ठ अधिवक्ता की पदवी इस साल के शुरू में उस वक्त वापस ले ली गयी थी जब उन्होंने एक ऑन लाइन प्रेस कांफ्रेंस में न्यायालय की रजिस्ट्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये थे।

सभी न्यायाधीशों की 23 अगस्त को हुयी बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया:

‘‘इतने विलंब से की गयी क्षमा याचना के बारे में अगर यह मान भी लिया जाये कि यह पूरी नेकनीयती और शुचिता के साथ गयी है तो भी इसे अस्वीकार करना होगा क्योंकि यह इस संस्थान की गरिमा और सम्मान को पहुंचायी गयी अपूर्णीय क्षति को देखते हुये निरर्थक हो गयी है।’’
गुजरात उच्च न्यायालय

गुजरात उच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीशों की बैठक ने कहा कि ओजा की क्षमायाचना को स्वीकार करना न्यायालय के गौरव और उसकी गरिमा को बरकरार रखने और जनता का न्यायपालिका में विश्वास बनाये रखने में उसकी विफलता होगी। आदेश की एक प्रति बार एंड बेंच के पास है।

इसमें कहा गया है, ‘‘श्री ओजा अपने कदाचार के मामले में हमेशा उच्च न्यायालय से ही उदारता दिखाने और उन्हें क्षमा करने की अपेक्षा क्यों करते हैं? ओजा खुद संयम क्यों नहीं रखते और एक वरिष्ठ अधिवक्ता की पदवी के अनुरूप आचरण क्यों नहीं करते? इस संस्थान पर बहुत ही सुनियोजित और सतर्कता पूर्वक किये गये इस बेवजह किये गये हमले को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और क्षमा नहीं दी जानी चाहिए। यदि इस तरह के हमले के साथ सख्ती से पेश नहीं आया गया तो यह राज्य के सर्वोच्च न्यायालय के सम्मान औ गरिमा को प्रभावित करेंगे। न्यायपालिका की संस्थान की बुनियाद पर इस तरह का सुनियोजित और बदनाम करने वाले हमले को सिर्फ माफीनामे के साथ खत्म नहीं किया जा सकता। ’’

यतिन ओजा ने 10 अगस्त को अपने बयानों के लिये क्षमा याचना की थी। इन बयानों पर उच्च न्यायालय ने ओजा के खिलाफ स्वत: ही आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी और 18 जुलाई को सभी न्यायाधीशों की बैठक ने उनकी वरिष्ठ अधिवक्ता की पदवी वापस ले ली थी।

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