

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ पुलिस की साइबर सेल को निर्देश दिया है कि वह एक महिला के मोबाइल नंबर को बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाए, जिसे उसके पति की शिकायत के बाद ब्लॉक कर दिया गया था।
जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीज़न बेंच ने कहा कि पुलिस ने पति-पत्नी के बीच वैवाहिक कलह के चलते पति द्वारा की गई एक झूठी शिकायत के आधार पर नंबर ब्लॉक कर दिया था।
अदालत ने कहा, "राज्य की एजेंसियों द्वारा लापरवाही से की गई कार्रवाई के कारण किसी भी नागरिक के साथ इस तरह का अन्याय नहीं किया जा सकता।"
पत्नी ने अपना मोबाइल नंबर वापस चालू करवाने के लिए एक रिट याचिका दायर की थी। मार्च में कोर्ट ने लखनऊ के पुलिस कमिश्नर के ऑफिस में साइबर सेल के इंचार्ज से पूछा था कि उनका नंबर क्यों ब्लॉक किया गया था। 15 मई को कोर्ट ने कहा कि वह पुलिस द्वारा दिए गए जवाब से संतुष्ट नहीं है।
कोर्ट ने कहा, "याचिकाकर्ता और प्रतिवादी नंबर 5 के बीच ज़ाहिर तौर पर पति-पत्नी का कोई विवाद है, और जो भी शिकायत थी, वह उसके पति से जुड़ी है। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट के साइबर सेल के इंचार्ज के निजी हलफनामे में जो बात कही गई है, वह बहुत ही गैर-ज़िम्मेदाराना है। उन्होंने साइबर पोर्टल के ज़रिए मिले डेटा को ब्लॉक करने, डेबिट करने या फ्रीज़ करने के संबंध में भारत सरकार के गृह मंत्रालय के किसी आदेश का हवाला दिया है। ये ऐसे आदेश हैं, जिनका गलत इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।"
इसलिए, कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और पुलिस को आदेश दिया कि वह उस महिला के पुराने मोबाइल नंबर को वापस चालू करवाना सुनिश्चित करे।
कोर्ट ने आदेश दिया, "लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट के साइबर सेल के इंचार्ज संबंधित टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर/मोबाइल सर्विस कंपनी (जो JIO टेलीकॉम सर्विस लिमिटेड लगती है) से संपर्क करके याचिकाकर्ता का मोबाइल नंबर वापस चालू करवाने के लिए तुरंत कदम उठाएंगे, और ज़रूरी कदम उठाने के बाद एक हफ़्ते के अंदर अपना हलफनामा दायर करेंगे।"
कोर्ट ने पति को भी यह बताने का निर्देश दिया कि उसने एक बेबुनियाद शिकायत दर्ज कराई थी, इसलिए उससे अपनी पत्नी को हर्जाना देने के लिए क्यों न कहा जाए।
याचिकाकर्ता-पत्नी की तरफ से वकील प्रशांत पांडे ने पैरवी की।
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Allahabad High Court raps UP Police for blocking woman's phone number on husband's bogus complaint