बॉम्बे हाईकोर्ट ने AI डीपफेक के खिलाफ याचिका पर एक्ट्रेस श्रुति हासन को अंतरिम राहत दी

हासन ने अपने पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) की सुरक्षा के लिए याचिका दायर की थी।
Shruti Haasan
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्ट्रेस श्रुति हासन की याचिका पर उनके पक्ष में एक अंतरिम आदेश जारी किया है। इस याचिका में उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बने और ऐसे अन्य कंटेंट के पब्लिकेशन पर रोक लगाने की मांग की थी, जो उनकी इमेज या शक्ल-सूरत का गलत इस्तेमाल करके उनके पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन करते हैं।

हासन ने अपनी पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी अधिकारों की सुरक्षा के लिए कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। उनका कहना था कि AI से बने डीपफेक (जिनमें बिना इजाज़त उनकी तस्वीर का इस्तेमाल किया गया), छेड़छाड़ किए गए वीडियो, बिना इजाज़त कमर्शियल एंडोर्समेंट और बिना लाइसेंस वाले सामान के ज़रिए उनके अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।

जस्टिस माधव जामदार ने एक अंतरिम आदेश में माना कि किसी की तस्वीर के साथ इस तरह की डिजिटल छेड़छाड़ और ऑनलाइन डीपफेक के तेज़ी से फैलने से गंभीर नुकसान होता है।

कोर्ट ने कहा, "वादी (हासन) की इस बात में दम है कि AI से बने डीपफेक, छेड़छाड़ की गई तस्वीरों, चैटबॉट्स और दूसरे उल्लंघनकारी कंटेंट के लगातार फैलने से वादी की गुडविल, प्रतिष्ठा और कमर्शियल हितों को कभी न ठीक होने वाला नुकसान हुआ है और हो रहा है। ऐसे नुकसान की भरपाई सिर्फ़ पैसे से नहीं की जा सकती, क्योंकि एक बार जब डीपफेक कंटेंट इंटरनेट पर फैल जाता है, तो उसे अनगिनत बार कॉपी और शेयर किया जा सकता है, जिससे वादी के पर्सनैलिटी अधिकारों और पब्लिक इमेज को हमेशा के लिए नुकसान पहुँचता है।"

Justice Madhav Jamdar
Justice Madhav Jamdar

जस्टिस जामदार ने पर्सनैलिटी और प्राइवेसी के अधिकारों को मिले संवैधानिक समर्थन पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि बिना इजाज़त डिजिटल बदलाव करना भारत के संविधान में दी गई बुनियादी आज़ादी का उल्लंघन है।

बेंच ने कहा, "रिकॉर्ड पर मौजूद जानकारी से साफ़ पता चलता है कि वादी (हासन) की तस्वीरों और वीडियो के साथ छेड़छाड़ करके बनाए गए मॉर्फ्ड, डीपफेक और/या सुपरइम्पोज़्ड कंटेंट से उनके पर्सनैलिटी राइट्स, पब्लिसिटी राइट्स और नैतिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। हासन के पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी अधिकारों को भारत के संविधान के आर्टिकल 19(1)(a) के तहत सुरक्षा मिली हुई है, यानी बोलने और अपनी बात कहने की आज़ादी का अधिकार। जीवन और व्यक्तिगत आज़ादी का अधिकार, जिसमें प्राइवेसी का अधिकार भी शामिल है, भारत के संविधान के आर्टिकल 21 के तहत सुरक्षित है। संविधान के आर्टिकल 21 के तहत जीवन के अधिकार में सम्मान के साथ जीने का अधिकार भी शामिल है। इस तरह, प्रथम दृष्टया एक मज़बूत मामला बनता है।"

इसके बाद बेंच ने हासन की याचिका में बताए गए कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया।

हासन ने पिछले महीने कई ऐसी संस्थाओं के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर किया था जो उनकी पहचान का इस्तेमाल करके बिना इजाज़त कंटेंट बनाने, होस्ट करने और फैलाने में शामिल थीं।

इससे पहले की सुनवाई में, हाई कोर्ट ने कई ऐसे प्रतिवादियों (डिफेंडेंट्स) को आख़िरी मौका दिया था जिन्होंने कोई जवाब नहीं दिया था, ताकि वे पेश हो सकें या अपना जवाब दाखिल कर सकें।

कई हफ़्तों का समय मिलने के बावजूद कई प्रतिवादी पेश नहीं हुए या अपना बचाव पेश नहीं किया, इसलिए कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ अंतरिम रोक (ad-interim injunction) का आदेश दिया।

इस बीच, सुनवाई में शामिल हुए कुछ प्रतिवादियों के वकीलों ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि हासन की कानूनी टीम से साफ़ URL मिलने पर उनके प्लेटफ़ॉर्म पर मौजूद उल्लंघनकारी कंटेंट को तुरंत हटा दिया जाएगा।

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Bombay High Court grants actress Shruti Haasan interim relief on plea against AI deepfakes

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