कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2007 के एक और मामले में नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार को गिरफ़्तार करने पर राज्य सरकार को फटकार लगाई

राज्य ने कहा कि चुनाव आयोग ने उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मामलों को चिह्नित किया था, जैसा कि आमतौर पर चुनावी उम्मीदवारों के मामले में किया जाता है।
Congress leader Milan Pradhan
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर हैरानी जताई। उन्हें 19 सितंबर को 2007 के नंदीग्राम ज़मीन अधिग्रहण विरोध-प्रदर्शन से जुड़े एक और आपराधिक मामले में गिरफ़्तार किया गया था; यह ऐसा छठा मामला है जिसमें प्रधान को गिरफ़्तार किया गया है [मिलन प्रधान बनाम पश्चिम बंगाल राज्य]।

जस्टिस सौगत भट्टाचार्य को पहले 2007 के पांच आपराधिक मामलों के बारे में बताया गया था जिनमें प्रधान को गिरफ्तार किया गया था। ये गिरफ्तारियां नंदीग्राम उपचुनाव से कुछ हफ़्ते पहले हुई थीं, जिसमें वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट के समर्थन से चुनाव लड़ रहे हैं।

प्रधान ने इस हफ़्ते की शुरुआत में कोर्ट से इन सभी आपराधिक मामलों की जानकारी और उपचुनाव खत्म होने तक सुरक्षा की मांग की थी। तब तक, उन्हें पांच मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका था और 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

हाईकोर्ट ने 22 सितंबर को राज्य सरकार के इस आश्वासन को दर्ज किया कि प्रधान को 2007 के किसी और आपराधिक मामले में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। इसलिए, कोर्ट ने कहा कि अंतरिम सुरक्षा के लिए कोई निर्देश जारी करने की ज़रूरत नहीं है और प्रधान की याचिका पर सुनवाई 12 अक्टूबर तक टाल दी।

हालांकि, प्रधान के वकील, सीनियर एडवोकेट अयन भट्टाचार्य ने आज कोर्ट को बताया कि 22 सितंबर के आदेश के बाद, एक ट्रायल कोर्ट ने 23 सितंबर को कांग्रेस उम्मीदवार को 2007 के एक और आपराधिक मामले में 7 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

भट्टाचार्य ने तर्क दिया कि इस छठे मामले के बारे में न तो प्रधान को बताया गया और न ही इसके सिलसिले में उन्हें कोई प्रोडक्शन वारंट जारी किया गया।

एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) राजदीप मजूमदार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि प्रधान को 22 सितंबर को हाई कोर्ट में सुनवाई से पहले ही, 19 सितंबर तक इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका था।

उन्होंने कहा कि इस मामले में 2021 से ही एक प्रोडक्शन वारंट भी लंबित है।

उन्होंने कहा, "पिछली सरकार ने 2020 में सभी छह मामले वापस ले लिए थे। इन्हें वापस लेने के लिए एक अर्ज़ी दाखिल की गई थी। ये सभी हत्या के मामले थे। एक PIL दाखिल की गई थी। एक डिवीज़न बेंच ने कहा कि ये मामले वापस नहीं लिए जा सकते; 2021 में इन्हें फिर से शुरू किया गया और गिरफ्तारी के वारंट जारी किए गए। ये वारंट लंबित हैं।"

जज ने पूछा, "अगर 2021 में वारंट जारी किए गए थे, तो जांच अधिकारी 18 सितंबर तक क्या कर रहे थे?"

AAG ने जवाब दिया, "बिल्कुल, मेरे मन में भी यही सवाल था। पिछली सरकार (ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC सरकार) इन मामलों को वापस लेना चाहती थी।"

उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले उपचुनावों से पहले, चुनाव आयोग ने चुनावी उम्मीदवारों के मामलों की तरह ही इन मामलों को भी चिह्नित किया था।

कोर्ट ने आगे कहा, "जब हाई कोर्ट ने (राज्य के आश्वासन पर) यह आदेश दिया कि कोई और मामला लंबित नहीं है - और यह आदेश खुद AAG के बयान के आधार पर दिया गया था - तो आपको उसका सम्मान करना चाहिए; अगर आज सामने आए मामले की तरह कोई और मामला लंबित है, तो कोई कदम न उठाएं।"

AAG मजूमदार ने भरोसा दिलाया, "इन छह मामलों के अलावा, हम कोई और कदम नहीं उठाएंगे।"

Justice Saugata bhattacharya
Justice Saugata bhattacharya

हालांकि, सीनियर एडवोकेट भट्टाचार्य ने कहा कि छठे मामले (खेजुरी पुलिस द्वारा दर्ज) में प्रधान की गिरफ्तारी, 22 सितंबर को कोर्ट में राज्य सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों का खुला उल्लंघन है।

उन्होंने कोर्ट से अपील की कि उपचुनाव खत्म होने तक प्रधान को सुरक्षा दी जाए।

कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे छठे मामले के संबंध में 12 अक्टूबर तक कोई सख्त कार्रवाई न करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में प्रधान को गिरफ्तार नहीं माना जाना चाहिए।

कोर्ट ने आदेश दिया, "कोर्ट को ऐसा कोई दस्तावेज़ नहीं मिला जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि (खेजुरी मामले) के संबंध में प्रोडक्शन वारंट याचिकाकर्ता को उस समय तामील किया गया था। इसलिए, प्रोडक्शन वारंट के तामील होने के संबंध में राज्य के प्रतिवादियों का तर्क इस चरण में खारिज किया जाता है। संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे (खेजुरी मामले) के संबंध में 12 अक्टूबर तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई न करें। उक्त आपराधिक मामले में याचिकाकर्ता को गिरफ्तार नहीं माना जाएगा।"

कोर्ट ने आगे कहा,

"यह ध्यान देना आश्चर्यजनक है कि उक्त आपराधिक मामला 2007 का है, और जांच अधिकारी ने 19 सितंबर (2026) को निचली अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता को 'गिरफ्तार दिखाया' (shown arrest) जाने का अनुरोध किया था।"

इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।

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Calcutta High Court pulls up State for arresting Nandigram Congress candidate in yet another 2007 case

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