

कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल पुलिस को तृणमूल कांग्रेस के MLA परेश राम दास के खिलाफ कोई भी ज़बरदस्ती की कार्रवाई करने से रोक दिया।
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने यह आदेश दास की उस याचिका पर दिया, जिसमें उन्होंने 16 मई को कैनिंग पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ छह क्रिमिनल केस दर्ज होने के बाद यह याचिका दायर की थी। अंतरिम सुरक्षा सिर्फ़ छह FIR तक ही सीमित है।
कोर्ट ने आदेश दिया, “30-06-2026 तक कोर्ट की इजाज़त के बिना याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई ज़बरदस्ती वाला कदम नहीं उठाया जाएगा। हालांकि, जांच कानून के मुताबिक की जाएगी, और याचिकाकर्ता को जांच एजेंसी के साथ सहयोग करना होगा।”
इसके अलावा, बेंच ने राज्य को यह छूट दी कि अगर वह जांच में सहयोग नहीं करता है, तो वह अंतरिम प्रोटेक्शन हटाने की मांग कर सकता है।
कोर्ट ने कहा कि छह मामलों में से पांच 2021 की घटनाओं से जुड़े हैं।
इसने छठे मामले के असली होने पर भी शक जताया।
बेंच ने कहा, “पहली नज़र में ऐसा लगता है कि शिकायत के नीचे पिटीशनर का नाम अलग तरीके से लिखा गया था। चूंकि जांच शुरुआती स्टेज में है, इसलिए कोर्ट कोई और बात नहीं कर रहा है।”
दास की तरफ से सीनियर एडवोकेट किशोर दत्ता ने आज दलील दी कि FIR पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक बदले का नतीजा थीं। दत्ता ने आगे कहा कि ज़्यादातर शिकायतें 2021 की हैं।
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Calcutta High Court stays coercive action against TMC MLA after police registers 6 FIRs on same day