

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को आदेश जारी कर यूट्यूबर भुवन बाम की बिना इजाज़त के ऑनलाइन अपलोड की गई तस्वीरों को हटाने का निर्देश दिया।
जस्टिस ज्योति सिंह ने कहा कि तस्वीरों को हटाने का आदेश जॉन डो पार्टियों (बिना नाम वाले प्रतिवादियों) पर लागू होगा। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि वह बाम के पर्सनैलिटी राइट्स पर कोई आदेश नहीं देगा।
जस्टिस सिंह ने समझाया कि कोई भी कोर्ट सुनवाई की पहली तारीख पर पर्सनैलिटी राइट्स पर शुरुआती फैसला नहीं दे सकता।
बाम भारत के सबसे जाने-माने डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स में से एक हैं, जिनके YouTube पर 26.6 मिलियन से ज़्यादा सब्सक्राइबर हैं और Instagram और X (पहले Twitter) जैसे प्लेटफॉर्म पर भी उनके बहुत ज़्यादा फॉलोअर्स हैं।
उन्होंने पर्सनैलिटी राइट्स के उल्लंघन के लिए मुकदमा दायर किया है, यह तर्क देते हुए कि कई संस्थाएं बिना इजाज़त, लाइसेंस या अनुमति के उनके नाम, आवाज़, इमेज, शक्ल और उनकी पर्सनैलिटी के दूसरे एलिमेंट्स का गलत इस्तेमाल कर रही हैं।
YouTuber ने दावा किया कि ऐसे काम उनकी पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स का उल्लंघन हैं, साथ ही दोनों वादियों के संयुक्त रूप से मालिकाना हक वाले रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क, कॉपीराइट और दूसरी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी का भी उल्लंघन है।
बाम और उनकी कंपनी BB Ki Vines ने तर्क दिया कि उन्होंने जनता के बीच एक खास पहचान बनाई है और तीसरे पक्षों द्वारा बिना इजाज़त के कमर्शियल इस्तेमाल से कन्फ्यूजन और धोखा हो सकता है।
बाम की तरफ से वकील सौरभ सेठ, शांतनु अग्रवाल, चंद्रयी मैत्रा, अल्लाका मलिकाइल, राघव थरेजा, नीलमप्रीत देओल, अभिरूप राठौर और कबीर देओल पेश हुए।
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