

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें पब्लिक प्रॉसिक्यूटर, एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के लिए आधार-बेस्ड बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य कर दी गई थी।
दिल्ली प्रॉसिक्यूटर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आदेश के खिलाफ याचिका दायर करने के बाद जस्टिस अमित महाजन ने यह आदेश पारित किया।
इस मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में होगी।
यह याचिका 'डायरेक्टर ऑफ़ प्रॉसिक्यूशन' के 5 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई थी, जिसमें सभी प्रॉसिक्यूटिंग अधिकारियों (अभियोजन अधिकारियों) के लिए 12 अक्टूबर से 'आधार इनेबल्ड बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम' (AEBAS) पर रजिस्टर करने और रोज़ाना अपनी हाज़िरी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।
दलील दी गई कि यह निर्देश संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है और अनुच्छेद 14 के तहत मनमाना है। यह आरोप भी लगाया गया कि यह आदेश 'आधार अधिनियम, 2016' के प्रावधानों का उल्लंघन करता है।
याचिका के अनुसार,
"प्रॉसिक्यूटिंग अधिकारी, 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' की धारा 18 और 19 के तहत नियुक्त कोर्ट के अधिकारी होते हैं; उनका काम कोर्टरूम में होता है और उनकी मौजूदगी रोज़ाना न्यायिक आदेश शीट में दर्ज की जाती है।"
याचिका में कहा गया कि एसोसिएशन ने पहले भी हाई कोर्ट में हाज़िरी से जुड़े सर्कुलर को चुनौती दी थी। 17 अगस्त को कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे याचिका को एक 'रिप्रेजेंटेशन' (अभ्यावेदन) के तौर पर लें और व्यक्तिगत सुनवाई का मौका देने के साथ चार हफ़्ते के भीतर उस पर फ़ैसला करें; साथ ही, अगर एसोसिएशन असंतुष्ट रहती है तो उसे दोबारा कोर्ट आने की छूट भी दी गई थी।
हालांकि, सुनवाई 15 सितंबर को हुई, जबकि तय चार हफ़्ते की समय-सीमा खत्म हो चुकी थी।
एसोसिएशन ने आगे यह भी कहा कि गृह विभाग ने 30 सितंबर की बैठक के मिनट्स (कार्यवृत्त) के ज़रिए उनके रिप्रेजेंटेशन को खारिज कर दिया, लेकिन न तो कोई कारण बताया और न ही आधार ऑथेंटिकेशन को लेकर सदस्यों की आपत्तियों पर कोई बात की।
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Delhi High Court stays order making Aadhaar biometric attendance mandatory for public prosecutors