अगर आप कोई जानी-मानी हस्ती है तो आलोचनाओ के लिए तैयार रहे:पर्सनैलिटी राइट्स केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने आचार्य बालकृष्ण से कहा

Google ने अदालत को बताया कि बालकृष्ण ने सुप्रीम कोर्ट के उनके और पतंजलि के खिलाफ आए प्रतिकूल आदेश से जुड़ी खबरों और टिप्पणियों को हटाने की मांग की थी।
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पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण द्वारा दायर 'पर्सनैलिटी राइट्स' (व्यक्तित्व अधिकारों) से जुड़े एक मुकदमे की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को टिप्पणी की कि किसी भी सार्वजनिक हस्ती को आलोचनाओं का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

जस्टिस तुषार राव गेडेला ने कहा कि कोर्ट लोगों को पब्लिक फ़िगर्स का मज़ाक उड़ाने से नहीं रोक सकता, जब तक कि वह आलोचना अपमानजनक या नीचा दिखाने वाली न हो।

कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की, जब उसने देखा कि बालकृष्ण इंडिया टुडे, इकोनॉमिक टाइम्स जैसे न्यूज़ आउटलेट्स द्वारा प्रकाशित कई न्यूज़ रिपोर्ट्स और कुछ कैरिकेचर्स को हटाने की मांग कर रहे थे।

कोर्ट ने कहा, “आपके पास अख़बार हैं, आपके पास कार्टूनिस्ट हैं। वे कैरिकेचर्स बनाते हैं, वे लोगों का मज़ाक उड़ाते हैं, है ना? अब, क्या इसे रोका जा सकता है? अगर आप एक पब्लिक फ़िगर बनने जा रहे हैं, तो कृपया आलोचनाओं के लिए भी तैयार रहें। लोग मज़ाक उड़ाएंगे। हम इसे नहीं रोक सकते, जब तक कि यह अपमानजनक न हो या कुछ ऐसा न हो जिससे आपकी इज़्ज़त कम हो या जो आपको नीचा दिखाए।”

Justice Tushar Rao Gedela
Justice Tushar Rao Gedela

Google की तरफ से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि बालकृष्ण ने अपने 'पर्सनैलिटी सूट' में जो निर्देश मांगे हैं, वे "बहुत खतरनाक" हैं, क्योंकि वह सुप्रीम कोर्ट की बालकृष्ण और पतंजलि के खिलाफ की गई सख्त टिप्पणियों से जुड़े कई न्यूज़ आर्टिकल और कमेंट्री को हटाने की मांग कर रहे हैं।

Google ने कहा कि India Today और Economic Times जैसे मीडिया संगठन, जिनके आर्टिकल हटाने की मांग की गई थी, उन्हें तो इस केस में पार्टी भी नहीं बनाया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे सूट का इस्तेमाल सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज़ के खिलाफ परोक्ष लड़ाई लड़ने के लिए नहीं किया जा सकता।

बालकृष्ण की तरफ से सीनियर एडवोकेट अरविंद नायर पेश हुए और कहा कि वह यह बयान देने के लिए तैयार हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ी कोई भी चीज़ नहीं हटाई जाएगी।

उन्होंने आगे कहा कि बालकृष्ण की न सिर्फ शहरी इलाकों में, बल्कि देश के ग्रामीण हिस्सों में भी अच्छी-खासी फैन फॉलोइंग है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग, अपने सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक बैकग्राउंड की वजह से, असली कंटेंट और हेर-फेर वाले मीडिया - जिसमें डीप फेक, मनगढ़ंत वीडियो या आर्टिफिशियल वॉइस-ओवर शामिल हैं - के बीच फर्क करने के लिए ज़रूरी तकनीकी जानकारी या डिजिटल साक्षरता नहीं रखते होंगे।

Arvind Nayar
Arvind Nayar

जस्टिस गेडेला ने कहा कि जिन रिपोर्टों को हटाने की मांग की गई थी, उनमें से एक 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' की एक ख़बर थी, जिसमें कहा गया था कि पतंजलि की कई फ़र्ज़ी वेबसाइटें जांच के दायरे में हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) से जुड़ा मुक़दमा कोई जनहित याचिका (PIL) नहीं है, जिसमें कोई भी व्यक्ति हर तरह की मांग कर सके।

कोर्ट ने कहा, "क्या हम उन्हें [न्यूज़ संगठनों को] उनकी पीठ पीछे यह ख़बर हटाने का निर्देश दे सकते हैं? यह कोई जनहित याचिका नहीं है। यहां तक ​​कि जनहित याचिका में भी हम यह सुनिश्चित करते हैं कि संबंधित पक्ष हमारे सामने मौजूद हों। आपने हर किसी पर बहुत ही सामान्य और व्यापक किस्म के आरोप लगाए हैं।"

कोर्ट ने माना कि बालकृष्ण के पास पर्सनैलिटी राइट्स हैं, और उनकी सुरक्षा के लिए उन्हें अपनी मांगों को और अधिक स्पष्ट और सीमित करना होगा।

नायर ने कहा कि वह अपने मुवक्किल से निर्देश लेकर कल (मंगलवार को) वापस आएंगे।

इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी।

सीनियर एडवोकेट नायर के साथ, एडवोकेट याज्ञवल्क्य सिंह, दिव्या स्वामी और ऋषभ रंजन बालकृष्ण की ओर से कोर्ट में पेश हुए।

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