केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला में मुख्य पुजारी के चयन की देखरेख के लिए रिटायर्ड जस्टिस वीजी अरुण को नियुक्त किया

जस्टिस अरुण को सबरीमाला में मेलसांथी (मुख्य पुजारी) के चयन की निगरानी के लिए ऑब्ज़र्वर नियुक्त किया गया है और उन्हें लॉटरी के अंतिम ड्रॉ से पहले कोर्ट को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
Justice VG Arun and Sabarimala temple
Justice VG Arun and Sabarimala temple
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केरल हाई कोर्ट ने सबरीमाला के श्री धर्म संस्था मंदिर और मलिकप्पुरम मंदिर में मेलशांति (मुख्य पुजारियों) के होने वाले चयन की देखरेख के लिए, हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस वी.जी. अरुण को 'ऑब्जर्वर' नियुक्त किया है। [सुओ मोटो बनाम केरल राज्य]

जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस केवी जयकुमार की बेंच ने मुख्य पुजारियों के चयन में निष्पक्षता और पारदर्शिता से जुड़े एक स्वतः संज्ञान (suo motu) मामले में यह निर्देश जारी किया।

29 सितंबर, 2026 के अपने आदेश में कोर्ट ने कहा, "सबरीमाला के स्पेशल कमिश्नर की रिपोर्ट देखने के बाद, हम इस कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस वीजी अरुण को 'ऑब्जर्वर' नियुक्त करते हैं और उनसे अनुरोध करते हैं कि वे तिरुवनंतपुरम में त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड के हेड ऑफिस में साल 1202 ME (2026-2027) के लिए सबरीमाला श्री धर्म संस्था मंदिर और मलिकप्पुरम मंदिर के मेलसंथियों (मुख्य पुजारियों) के चयन की प्रक्रिया की देखरेख करें।"

जस्टिस अरुण से यह भी कहा गया है कि जब लॉटरी के ज़रिए अंतिम चयन किया जाए, तो वे सबरीमाला में मौजूद रहें।

Justice Raja Vijayaraghavan V and Justice KV Jayakumar
Justice Raja Vijayaraghavan V and Justice KV Jayakumar

सबरीमाला के मुख्य पुजारियों के चयन की प्रक्रिया में निष्पक्षता, पारदर्शिता और गाइडलाइंस का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी कदमों पर सबरीमाला स्पेशल कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए कार्यवाही शुरू की गई थी।

इस साल 78 आवेदनों पर विचार किया गया - 48 सबरीमाला के लिए और 30 मलिकप्पुरम के लिए। विजिलेंस जांच के बाद, सबरीमाला के लिए पांच और मलिकप्पुरम के लिए तीन आवेदकों को तिरुवनंतपुरम में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) मुख्यालय में 5 अक्टूबर को होने वाले इंटरव्यू के लिए चुना गया।

चयन प्रक्रिया में इंटरव्यू के बाद उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करना और फिर गर्भगृह के सामने लॉटरी (ड्रॉ ऑफ लॉट्स) के ज़रिए अंतिम चयन करना शामिल है।

इस प्रक्रिया को पहले भी चुनौती दी गई है और सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं, जिनमें चयन समिति के गठन, मार्क्स देने और इंटरव्यू की प्रक्रियाओं से जुड़ी गाइडलाइंस शामिल हैं।

इस साल की चयन प्रक्रिया के संबंध में, कोर्ट ने निर्देश दिया कि इंटरव्यू के दौरान मार्क्स केवल बॉल पॉइंट पेन से ही लिखे जाएं। मार्कशीट पर जस्टिस अरुण के हस्ताक्षर होने चाहिए और उन्हें TDB कमिश्नर की सुरक्षित कस्टडी में रखा जाना चाहिए। पूरी इंटरव्यू प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जानी चाहिए।

इंटरव्यू के बाद, ऑब्जर्वर और सबरीमाला स्पेशल कमिश्नर को हाई कोर्ट को रिपोर्ट सौंपनी चाहिए।

कोर्ट ने TDB को यह भी निर्देश दिया कि वह 15 अक्टूबर तक वीडियो रिकॉर्डिंग, मार्क लिस्ट और शॉर्टलिस्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करे और कहा कि लॉटरी की प्रक्रिया तभी आगे बढ़ सकती है जब कोर्ट इन सामग्रियों की जांच कर ले और आगे के आदेश दे।

पंडालम शाही परिवार को निर्देश दिया गया कि वे परंपरा के अनुसार सबरीमाला और मलिकप्पुरम मंदिरों के लिए लॉटरी निकालने हेतु क्रमशः एक युवा लड़के और लड़की को भेजें।

कोर्ट ने TDB को ऑब्जर्वर के रहने और परिवहन के लिए ज़रूरी व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया।

स्टैंडिंग काउंसिल जी. बीजू ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड का प्रतिनिधित्व किया।

[आदेश पढ़ें]

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Kerala High Court appoints retired Justice VG Arun to oversee selection of chief priest at Sabarimala

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