

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहमद बावा अब्बू अबूबकर बरेलवी की मौत की सज़ा पर रोक लगा दी। वह 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में मौत की सज़ा पाने वाले 38 दोषियों में से एक है [अहमद बावा उर्फ अब्बू अबूबकर बरेलवी बनाम गुजरात राज्य और अन्य]।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने यह आदेश तब दिया जब वे बरेलवी की उस चुनौती पर सुनवाई कर रहे थे जिसमें उन्होंने गुजरात हाई कोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी थी, जिसने उनकी सज़ा और मौत की सज़ा को बरकरार रखा था।
बरेलवी की ओर से पेश होते हुए उनके वकील ने कहा,
"मुझे पूरी तरह से साज़िश के आधार पर दोषी ठहराया गया है।"
इन दलीलों पर ध्यान देते हुए जस्टिस नाथ ने कहा,
"ठीक है, सज़ा पर अमल रोक दिया जाएगा।"
अहमदाबाद में सीरियल धमाके 26 जुलाई 2008 को हुए थे, जब शहर के अलग-अलग हिस्सों में कई धमाके हुए। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज़्यादा लोग घायल हो गए।
गुजरात की एक स्पेशल कोर्ट ने फरवरी 2022 में इस मामले में 49 आरोपियों को दोषी ठहराया। कोर्ट ने उनमें से 38 को मौत की सज़ा और 11 को उम्रकैद की सज़ा सुनाई, जबकि 28 अन्य को बरी कर दिया।
इसके बाद गुजरात हाई कोर्ट ने दोषियों को सज़ा सुनाए जाने के खिलाफ़ अपील और राज्य की ओर से मौत की सज़ा की पुष्टि की कार्यवाही पर सुनवाई की।
जुलाई 2026 में, हाई कोर्ट ने 38 दोषियों की सज़ा और मौत की सज़ा को बरकरार रखा।
बरेल्वी ने सुप्रीम कोर्ट में उस फ़ैसले को चुनौती दी।
गुरुवार की सुनवाई के दौरान, बरेल्वी के वकील ने गुजरात हाई कोर्ट के फ़ैसले की अनुवादित कॉपी भी मांगी, क्योंकि ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड गुजराती में थे।
कोर्ट ने गुजरात राज्य को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब मांगा।
कोर्ट ने मौत की सज़ा पर रोक भी लगा दी।
बरेल्वी की ओर से वकील अश्विन वैश, एमएस मुकर्रम, आशुतोष ठाकुर, अमित कुमार, हर्ष झा, यशस्वी दसारी और उत्तम पंवार पेश हुए।
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2008 Ahmedabad blasts: Supreme Court stays death sentence of convict Ahmed Barelvi