चोरबागान भगदड़:कलकत्ता हाईकोर्ट ने जांच की निगरानी से इनकार किया,कहा- राज्य जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश को नियुक्त कर सकता है

अदालत ने कहा आयोग का प्रमुख बनाने के लिए किसी कार्यरत जज को उपलब्ध कराना CJ के विवेक पर निर्भर है और यदि कोई जज उपलब्ध नही हो पाता तो राज्य सरकार HC के किसी सेवानिवृत्त जज को नामित कर सकती है।
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कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान 17 अक्टूबर को हुई चोरबागन भगदड़ की घटना की जांच के लिए एक जांच आयोग का गठन कर सकती है और इसके अध्यक्ष के रूप में किसी सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को नामित करने के लिए स्वतंत्र है। इस भगदड़ के पीछे कथित तौर पर गंभीर कमियां, कुप्रबंधन और लापरवाही जिम्मेदार थी [तपास कुमार डे बनाम पश्चिम बंगाल राज्य व अन्य]।

मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विट्ठलराव घुगे और न्यायमूर्ति शब्बर रशीदी की पीठ ने बताया कि राज्य सरकार ने मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के माध्यम से अदालत से अनुरोध किया था कि वे कलकत्ता उच्च न्यायालय के किसी कार्यरत न्यायाधीश को जांच आयोग का प्रमुख नियुक्त करने के लिए उपलब्ध कराएं।

अदालत ने कहा कि किसी कार्यरत न्यायाधीश को आयोग का प्रमुख बनाने के लिए उपलब्ध कराना मुख्य न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर करता है। यदि कोई कार्यरत न्यायाधीश उपलब्ध नहीं है, तो राज्य सरकार उच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नामित कर सकती है।

आदेश में कहा गया, "जांच आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करने के लिए इस अदालत के किसी कार्यरत न्यायाधीश को उपलब्ध कराना है या नहीं, यह मुख्य न्यायाधीश को प्रशासनिक स्तर पर तय करना है। यदि मुख्य न्यायाधीश किसी कार्यरत न्यायाधीश को जांच आयोग का प्रमुख बनाने के लिए उपलब्ध नहीं कराते हैं, तो राज्य सरकार को 'कमीशन ऑफ इंक्वायरीज एक्ट, 1952' (जांच आयोग अधिनियम, 1952) के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करनी होगी। उन्हें इस अदालत के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नियुक्त करके, कानून के अनुसार, 17.10.2026 को हुई दुर्भाग्यपूर्ण भगदड़ की जांच के लिए एक आयोग का गठन करना होगा।"

गौरतलब है कि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस जांच की निगरानी नहीं करेगी।

आदेश में कहा गया, "हम स्पष्ट करते हैं कि 'कमीशन ऑफ इंक्वायरीज एक्ट' के प्रावधानों को देखते हुए, उच्च न्यायालय इस जांच की निगरानी नहीं करेगा। आयोग जो रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा, उस पर आगे की कार्रवाई करना राज्य सरकार का काम होगा।"

अदालत तापस कुमार डे द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इस भगदड़ की जांच की मांग की गई थी।

चोरबगान सर्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में हुई इस त्रासदी में 19 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 7 साल का एक बच्चा भी शामिल था।

इससे पहले, राज्य सरकार ने मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विट्ठलराव घुगे को एक पत्र भेजकर सूचित किया था कि वे इस मामले की जांच के लिए एक आयोग गठित करने की योजना बना रहे हैं। इस पत्र में भगदड़ की जांच के लिए कई शर्तें शामिल थीं। इनमें भगदड़ के कारणों पर विचार करना, घटनाओं के क्रम को समझना, सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, पुलिस स्टेशन और कंट्रोल रूम के लॉग की जांच करना, और यह देखना शामिल था कि क्या भीड़ और आपदा प्रबंधन के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय ने कहा कि दुर्गा पूजा पंडालों में भीड़ को संभालने की आम रणनीति यह होती है कि संकरी गलियों से प्रवेश द्वार बनाए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद दुर्गा पूजा समितियों के सदस्यों में फेरबदल हुआ, जिसके चलते अनुभवहीन लोगों को ऐसी जिम्मेदारियां सौंप दी गईं, जिन्हें संभालने के लायक वे नहीं थे।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि चोरबगान जैसे थीम वाले पंडालों में सजावटी ढांचे, ऊंचे प्लेटफॉर्म, वेंटिलेशन की कमी और कम रोशनी थी। इसके साथ ही पुलिस और प्रबंधन कर्मियों की कमी भी थी, जिसके कारण वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ हो गई।

यह भी बताया गया कि इलाके में अचानक हुई बारिश ने स्थिति को और खराब कर दिया।

राज्य की ओर से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता बिलवदल भट्टाचार्य ने कहा कि चूंकि सरकार ने मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि वे भगदड़ की जांच के लिए एक न्यायाधीश उपलब्ध कराएं, इसलिए इस याचिका पर विस्तार से विचार करने की आवश्यकता नहीं है।

इन दलीलों के मद्देनजर, पीठ के समक्ष वर्तमान में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या पर भी चर्चा हुई।

अदालत ने कहा, "हमें पता है कि इस उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के स्वीकृत पदों की संख्या 72 है और वर्तमान में, यह अदालत 50 न्यायाधीशों के साथ काम कर रही है। इस अदालत की एक न्यायाधीश, न्यायमूर्ति शम्पा दत्त (पॉल), 27/10/2026 को सेवानिवृत्त हो रही हैं। इस अदालत के एक अन्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति अपूर्व सिन्हा रे, 25 नवंबर 2026 को सेवानिवृत्त होंगे। इसके बाद यह अदालत 48 न्यायाधीशों के साथ काम करेगी।"

इसलिए, अदालत ने जांच का नेतृत्व करने के लिए किसी कार्यरत न्यायाधीश को नियुक्त करने का कोई निर्देश नहीं दिया। इसके बजाय, अदालत ने कहा कि राज्य सरकार किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नामित करने के लिए स्वतंत्र है। इसके बावजूद, कोर्ट ने याचिका का निपटारा नहीं किया, बल्कि इसे लंबित रखा ताकि जरूरत पड़ने पर पक्षकार कोर्ट से संपर्क कर सकें।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय, तथा अधिवक्ता सुमन सेनगुप्ता, अनित कुमार दास, आशीष दत्ता, जोएब रऊफ और राहुल कुमार सिंह पेश हुए।

राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बिलवदल भट्टाचार्य, सरकारी वकील डी.एन. राय, और अधिवक्ता अनिंद्य बसु, प्रतिप मुखर्जी, इंद्रदीप पाल तथा विकास कुमार श्रीवास्तव उपस्थित हुए।

[आदेश पढ़ें]

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Chorebagan stampede: Calcutta High Court refuses to monitor investigation; says State can pick ex-judge for probe

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