

दिल्ली हाई कोर्ट ने 125 वेबसाइटों और डोमेन नामों को सस्पेंड करने का आदेश दिया है, जो लॉटरी, गेमिंग और उससे जुड़ी सेवाएं देने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के रजिस्टर्ड जियो (Jio) ट्रेडमार्क का गलत इस्तेमाल कर रहे थे [रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड बनाम राहुल मीणा और अन्य]।
जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने 7 अक्टूबर को अंतरिम आदेश पारित किया। उन्होंने पाया कि संदिग्ध वेबसाइटों की पहचान करने के लिए कानूनी शर्तें प्रथम दृष्टया पूरी हो रही थीं।
अदालत ने गूगल को अपने ब्लॉगर प्लेटफ़ॉर्म पर होस्ट किए गए एक वेबपेज को हटाने का भी निर्देश दिया, जिस पर आरोप था कि वह जियो (Jio) ट्रेडमार्क का उल्लंघन करता है।
ये निर्देश रिलायंस इंडस्ट्रीज़ द्वारा राहुल मीना और कई अन्य प्रतिवादियों (जिनमें डोमेन नेम रजिस्ट्रार, गूगल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और दूरसंचार विभाग शामिल हैं) के खिलाफ दायर ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले में जारी किए गए थे।
रिलायंस इंडस्ट्रीज़ ने रजिस्टर्ड जियो (Jio) ट्रेडमार्क पर विशेष कानूनी और कॉमन लॉ अधिकारों का दावा किया और आरोप लगाया कि कई वेबसाइटें गैर-कानूनी रूप से इस मार्क को अपने डोमेन नामों में शामिल कर रही थीं।
विवादित वेबसाइटों में jiolotteryi.com, jiolotterylogin.com, jiolotterygame.com, jiolottery.club और jiolottery.store शामिल थीं।
कंपनी के अनुसार, ये वेबसाइटें लॉटरी, गेमिंग, पेमेंट से जुड़ी और संबंधित सेवाओं के लिए JIO, JIO LOTTERY और JIO LOTTERY GAME जैसे मार्क्स का इस्तेमाल कर रही थीं।
कंपनी ने तर्क दिया कि ये मार्क्स उसके रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क के समान या भ्रम पैदा करने की हद तक मिलते-जुलते थे और इनसे उपभोक्ताओं के बीच भ्रम और धोखे की स्थिति पैदा होने की संभावना थी।
वेबसाइटों और उनकी सामग्री की जांच करने के बाद, कोर्ट ने पाया कि वे प्रथम दृष्टया (prima facie) दिल्ली हाई कोर्ट के 2019 के फैसले (UTV Software Communication Ltd. बनाम 1337X.to) में तय किए गए 'रोग वेबसाइट' (rogue websites) के पैमाने पर खरी उतरती थीं।
कोर्ट ने उस फैसले के कुछ हिस्सों का हवाला दिया, जिसमें बताया गया था कि कोई वेबसाइट 'रोग' है या नहीं, इसका निर्धारण मात्रात्मक (quantitative) के बजाय गुणात्मक (qualitative) आधार पर किया जाना चाहिए।
इस तरीके के तहत, कोर्ट वेबसाइट पर मौजूद उल्लंघनकारी सामग्री के अनुपात की गणना करने के बजाय वेबसाइट के मुख्य उद्देश्य और प्रभाव की जांच करते हैं।
फैसले में यह भी माना गया कि अलग-अलग URL को ब्लॉक करना नाकाफी हो सकता है क्योंकि 'रोग वेबसाइट' के संचालक प्रतिबंधों से बचने के लिए आसानी से अपने URL बदल सकते हैं।
इस सिद्धांत को लागू करते हुए, जस्टिस कौरव ने मीना को जियो (Jio) के समान या भ्रम पैदा करने की हद तक मिलते-जुलते डोमेन नामों और मार्क्स को रजिस्टर करने, चलाने, नियंत्रित करने, प्रमोट करने या किसी अन्य तरह से इस्तेमाल करने से रोक दिया।
कोर्ट ने प्रतिवादी के तौर पर शामिल डोमेन नेम रजिस्ट्रारों को यह भी निर्देश दिया कि वे अगले आदेश तक अपने आदेश के साथ संलग्न सूची (annexure) में पहचानी गई वेबसाइटों और अकाउंट्स को सस्पेंड कर दें।
इस सूची में 126 वेब एड्रेस की पहचान की गई थी, जिनमें मिरर वेबसाइटें, रीडायरेक्ट करने वाली वेबसाइटें और समान संरचना वाली वेबसाइटें शामिल थीं। इनमें से 125 वेबसाइटों को सस्पेंड करने का निर्देश दिया गया, जबकि एक ब्लॉगर वेबपेज के लिए अलग से उसे हटाने (takedown) का निर्देश जारी किया गया। इस लिस्ट में NameCheap, GoDaddy, Dynadot, Spaceship और दूसरे सर्विस प्रोवाइडर्स के ज़रिए रजिस्टर या होस्ट किए गए डोमेन नाम शामिल थे।
कोर्ट ने अंतरिम राहत की ज़रूरत को देखते हुए, कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट के तहत ज़रूरी प्री-इंस्टीट्यूशन मीडिएशन (मुकदमा शुरू करने से पहले मध्यस्थता) से रिलायंस इंडस्ट्रीज़ को छूट दे दी।
कोर्ट ने मामले में समन जारी किया और अंतरिम अर्ज़ी पर आगे विचार के लिए 30 नवंबर की तारीख तय की।
वकील अंकित साहनी, चिराग अहलूवालिया और मोहित ने रिलायंस इंडस्ट्रीज़ का पक्ष रखा।
वकील आदित्य गुप्ता और एंजेला अरोड़ा गूगल की ओर से पेश हुए।
स्टैंडिंग काउंसिल शिवांशु भारद्वाज और सरकारी वकील मनीष रावत ने केंद्र सरकार के अधिकारियों का पक्ष रखा।
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Delhi High Court orders suspension of 125 websites using Jio trademark for lottery, gaming services