

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कोर्ट के आदेशों का पालन न करने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई है। कर्ट ने कहा है कि सरकारी अधिकारियों के बीच कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही को लेकर अब वैसी गंभीरता नहीं दिखती, जैसी पहले हुआ करती थी [सेंथिल कुमार बनाम अनु जॉर्ज]।
जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने यह बात एक वेटेरिनरी असिस्टेंट सर्जन की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान कही। सर्जन ने आरोप लगाया था कि उनके ट्रांसफर पर रोक लगाने वाले अंतरिम आदेश का पालन नहीं किया गया।
कोर्ट ने कहा, "अब वे दिन चले गए जब 'अवमानना' शब्द सुनते ही लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते थे।"
जस्टिस स्वामीनाथन ने एक सीनियर वकील की बात याद करते हुए कहा कि अवमानना की कार्यवाही पहले इतनी कम होती थी कि जब भी ऐसा कोई मामला सुनवाई के लिए आता था, तो कोर्ट हॉल खचाखच भर जाता था।
जज ने कहा, "आदेश का पालन करना आम बात थी और उसका उल्लंघन अपवाद। उन्होंने अवमानना याचिकाओं के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई। अब स्थिति और भी खराब हो गई है।"
कोर्ट तमिलनाडु पशुपालन विभाग के वेटेरिनरी असिस्टेंट सर्जन डॉ. सेंथिलकुमार की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। सेंथिलकुमार का ट्रांसफर जून 2025 में डिंडीगुल से तिरुवन्नामलाई जिले के मल्लावाड़ी कर दिया गया था। अक्टूबर 2025 में उनका फिर से थूथुकुडी ट्रांसफर कर दिया गया, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी। इस ट्रांसफर पर रोक लगा दी गई थी।
इसके बाद, इस साल 14 मई को एक और ट्रांसफर ऑर्डर जारी किया गया। 29 मई को जस्टिस स्वामीनाथन ने इस ऑर्डर पर 31 जुलाई तक रोक लगा दी।
सेंथिलकुमार का दावा था कि ड्यूटी पर वापस लौटने की इजाज़त के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट के साथ आवेदन देने के बावजूद, उन्हें ऐसा करने की इजाज़त नहीं दी गई। आरोप है कि उनकी सैलरी भी जारी नहीं की गई।
इसके बाद उन्होंने कोर्ट की अवमानना (contempt of court) की याचिका दायर की और राज्य के अधिकारियों पर कोर्ट के अंतरिम आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
सुनवाई के दौरान, सरकार ने कोर्ट को बताया कि IAS अधिकारी SPA अमृत 15 जुलाई तक पशुपालन और वेटेरिनरी सेवाओं के डायरेक्टर थे, जिसके बाद IAS अधिकारी H कृष्णा उन्नी ने यह पद संभाला।
कोर्ट ने कहा कि अवमानना के मामले में दोनों अधिकारी जवाबदेह हैं।
जस्टिस स्वामीनाथन ने नाराज़गी भी जताई क्योंकि कोर्ट के लगभग दस मिनट तक इंतज़ार करने के बावजूद सरकारी वकील संबंधित अधिकारियों से निर्देश नहीं ले पाए।
कोर्ट ने टिप्पणी की, "जब सरकार के सेक्रेटरी पहले प्रतिवादी (respondent) के तौर पर शामिल हैं, तो यह देखकर हैरानी होती है कि अधिकारी इतने लापरवाह हैं।"
जज ने ज़ोर दिया कि अवमानना के मामलों में पेश होने वाले सरकारी वकीलों को पहले से निर्देश लेने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि उन्हें या तो आदेश का पालन करने की रिपोर्ट देनी चाहिए या कोर्ट के निर्देशों का पालन न करने का कोई ठोस कारण बताना चाहिए।
आदेश में कहा गया, "सिर्फ़ सुनवाई टालने (adjournment) की मांग करना काफ़ी नहीं होगा।"
कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अवमानना की कार्यवाही में "कोर्ट की गरिमा" शामिल होती है और वकीलों का फ़र्ज़ है कि वे इसमें मदद करें।
जस्टिस स्वामीनाथन ने कहा, "आदेश का पालन न होने पर हर गुज़रते दिन के साथ कोर्ट की साख कम होती है।"
जज ने मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बट्टू देवानंद के अवमानना की कार्यवाही के प्रति सख़्त रवैये का भी ज़िक्र किया और कहा कि वे देर से पालन करने को भी माफ़ नहीं करते थे।
कोर्ट ने कहा, "मुझे लगता है कि हम सभी को उनके दिखाए रास्ते पर चलना चाहिए।"
इसके बाद हाईकोर्ट ने पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवा विभाग के पूर्व डायरेक्टर SPA अमृत और मौजूदा डायरेक्टर H कृष्णा उन्नी को नोटिस जारी किया।
याचिकाकर्ता की ओर से वकील M पुरुषोत्तमन, N अंदल श्री शंकरी, R रंगनाथन और S अरावणन पेश हुए।
सरकारी वकील सुगन्या ने इस मामले में अवमानना के आरोपी बनाए गए पशुपालन विभाग के अधिकारियों का पक्ष रखा।
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