लखीमपुर खीरी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से ट्रायल जज के ख़िलाफ़ आरोपों की जांच करने को कहा

वकील प्रशांत भूषण ने ट्रायल जज के कामकाज में अनियमितताओं का आरोप लगाया और उन्हें मामले से हटाने की मांग की।
Ashish Mishra, Lakhimpur Kheri Violence
Ashish Mishra, Lakhimpur Kheri Violence
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मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई कर रहे ट्रायल जज के खिलाफ वकील प्रशांत भूषण के आरोपों पर इलाहाबाद हाई कोर्ट से रिपोर्ट मांगी। [आशीष मिश्रा उर्फ ​​मोनू बनाम यूपी राज्य]।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार को ट्रायल के लिए एक सीनियर और अनुभवी पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने निर्देश दिया, "राज्य सरकार निर्देश ले और दो हफ़्ते के अंदर अपना हलफ़नामा रिकॉर्ड पर रखे कि इस मामले के लिए किस सीनियर, अनुभवी पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को नियुक्त किया जा सकता है।"

इसके अलावा, कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली से कहा कि वे ट्रायल जज के खिलाफ भूषण के आरोपों की जांच करें।

"इस IA (अंतरिम आवेदन) की एक कॉपी इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के सामने भी रखी जाए ताकि वे इस पर ध्यान दे सकें, और अगली तारीख से पहले इस IA के बारे में एक रिपोर्ट सीलबंद लिफ़ाफ़े में हमारे सामने पेश की जाए।"

Chief Justice of India Surya Kant and Justices Joymalya Bagchi and V Mohana
Chief Justice of India Surya Kant and Justices Joymalya Bagchi and V Mohana

पीड़ितों की ओर से पेश हुए भूषण ने आरोप लगाया कि ट्रायल जज ने खुद उन मामलों को अपने हाथ में ले लिया जो दूसरी अदालतों को सौंपे गए थे और आरोपियों को राहत दी। उन्होंने खास तौर पर आरोप लगाया कि जज ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) एक्ट के तहत कई मामले खुद को सौंपे और उनमें ज़मानत दे दी।

भूषण ने कहा, "कुछ बहुत परेशान करने वाली घटनाएं हुई हैं, जो आपकी अंतरात्मा को झकझोर देंगी कि यह जज, जो अभी इस मामले को देख रहे हैं, उन्होंने क्या किया है। ज़ाहिर है, उन्होंने जो किया है वह काफी चौंकाने वाला है, न सिर्फ इस मामले में बल्कि कई अन्य मामलों में भी।"

यह कार्यवाही अक्टूबर 2021 की लखीमपुर खीरी हिंसा से जुड़े ट्रायल की सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगातार की जा रही निगरानी से जुड़ी है, जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई थी।

पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा भी आरोपियों में शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी ट्रायल की गति पर चिंता जताई थी और गवाहों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने पहले निर्देश दिया था कि अहम गवाहों से प्राथमिकता के आधार पर पूछताछ की जाए और ट्रायल में तेज़ी लाई जाए।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान, भूषण ने लखीमपुर खीरी ट्रायल में एक चश्मदीद गवाह के साथ ट्रायल कोर्ट के जज के बर्ताव पर सवाल उठाए।

पिछले ट्रायल जज 15 अप्रैल को रिटायर हो गए और मौजूदा जज ने अगले दिन मामला संभाल लिया। भूषण के मुताबिक, 17 अप्रैल को चश्मदीद गवाह शेर सिंह पेश नहीं हो सके क्योंकि उनकी तबीयत ठीक नहीं थी और उन्होंने कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में जांच के बाद मेडिकल पर्ची जमा की थी। इसके बावजूद, भूषण ने आरोप लगाया कि जज ने उनके खिलाफ गैर-ज़मानती वारंट जारी कर दिया।

इन बातों पर ध्यान देते हुए, CJI कांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद ट्रायल कोर्ट को कार्यवाही में तेज़ी लाने का निर्देश दिया था। उन्होंने बताया कि अगर गवाह बिना किसी संतोषजनक कारण के पेश नहीं होते हैं, तो ट्रायल जज कार्रवाई कर सकते हैं।

हालांकि, भूषण ने कहा कि गवाह ने अपनी गैर-मौजूदगी का कारण पहले ही बता दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में पुलिस गवाह के माता-पिता के पास गई और उन्हें डराया-धमकाया, जिसके बाद गवाह ने कहा कि वह पेश नहीं होना चाहता।

कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि अभियोजन पक्ष ने उन 3 अन्य गवाहों से पूछताछ न करने का फैसला क्यों किया जिन्हें समन भेजा गया था। भूषण ने कहा कि हाल ही में सरकारी वकील को बदल दिया गया था और नए वकील के पास सिर्फ़ 4 महीने का अनुभव था।

इसके बाद CJI कांत ने राज्य सरकार को इस मामले के लिए एक सीनियर सरकारी वकील खोजने का निर्देश दिया।

भूषण ने यह भी आरोप लगाया कि लखीमपुर खीरी हिंसा से जुड़ा साइट प्लान ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड से गायब हो गया था। उन्होंने कहा कि जज ने इसके गायब होने पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया का पालन नहीं किया था। उन्होंने ट्रायल से जज को हटाने की मांग करते हुए कहा कि उनके बने रहने से "न्याय में भारी गड़बड़ी" हो सकती है।

हालांकि, जस्टिस बागची ने बताया कि ट्रायल जज पर प्रशासनिक नियंत्रण इलाहाबाद हाई कोर्ट का होता है, न कि सुप्रीम कोर्ट का।

इसलिए, कोर्ट ने निर्देश दिया कि भूषण की अर्ज़ी इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने रखी जाए।

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Lakhimpur Kheri case: Supreme Court asks Allahabad High Court to examine allegations against trial judge

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