आरोपियो का महिमामंडन समाज के हित मे नही: मध्यप्रदेश HC ने रिहा होने पर भीड़ द्वारा स्वागत करने वाले व्यक्ति की जमानत रद्द की

अदालत ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि आरोपी खुद को एक योद्धा के रूप में पेश करते हुए जेल से बाहर आया था, और उसे रिहा होने के बाद हवा में बंदूक से फायरिंग करते देखा गया था।
Madhya Pradesh High Court
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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक आरोपी को दी गई जमानत को रद्द कर दिया, जिसका स्वागत सौ लोगों की भीड़ ने उसके पैर छूकर और उसके नाम का जाप करते हुए किया था [श्रीमती रामलेश बाई बनाम मध्य प्रदेश राज्य]।

न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह अहलूवालिया ने धोखाधड़ी और अन्य अपराधों के आरोपितों की जमानत रद्द करते हुए तर्क दिया कि भीड़ द्वारा किसी आरोपी का महिमामंडन करने से समाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

अदालत ने कहा, "किसी आरोपी का महिमामंडन करना कभी भी समाज के साथ-साथ न्याय व्यवस्था के हित में नहीं हो सकता है। इसके अलावा, गवाह भी मुकरने लगे हैं जो महिमामंडन या जमानत पर रिहा होने का परिणाम हो सकता है।"

अदालत ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि आरोपी स्पष्ट रूप से खुद को एक योद्धा के रूप में पेश करते हुए जेल से बाहर आया था। अदालत को दिखाए गए एक वीडियो में आरोपी को रिहा होने के बाद हवा में बंदूक से फायरिंग करते देखा गया।

अदालत एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी जिसमें दावा किया गया था कि उसकी रिहाई पर, सौ से अधिक लोगों की भीड़ ने आरोपी का स्वागत किया, जिन्होंने न केवल उसे माला पहनाई और उसके पैर छुए, बल्कि उसके पक्ष में नारे भी लगाए। अगले दिन आरोपी ने हवा में गोलियां चलाईं और उसके समर्थकों ने आवेदक को चुनौती देते हुए नारेबाजी की।

आवेदक ने तर्क दिया कि आरोपी की रिहाई ने समाज में सदमे की लहरें भेज दीं और जिस तरह से वह जेल से बाहर आया, उसने मामले में गवाहों के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव डाला, जो मुकर रहे थे।

दूसरी ओर, आरोपी ने तर्क दिया कि उसका स्वागत करने वाले समर्थकों ने किसी अधिकार या आतंक का प्रदर्शन नहीं किया, और रिहाई के बाद एक आरोपी का आशीर्वाद भारतीय समाज की एक सामान्य विशेषता थी।

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि जमानत को बरी नहीं माना जा सकता है, और यह केवल एक अस्थायी राहत है। इस प्रकार यह माना गया कि आरोपी की कार्रवाई उसकी स्वतंत्रता का दुरुपयोग है और उसकी जमानत रद्द कर दी, उसे एक महीने की अवधि के भीतर निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।

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Glorification of accused not in interest of society: Madhya Pradesh High Court cancels bail of man who was welcomed by mob on release

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