

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक व्यक्ति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। उस व्यक्ति पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान 'पाकिस्तान जिंदाबाद' का नारा लगाने का आरोप था [डीएस रवि कुमार बनाम कर्नाटक राज्य]।
28 अक्टूबर के फैसले में, जस्टिस वी. श्रीशानंद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा आयोजित प्रदर्शन में शामिल लोगों द्वारा जानबूझकर ऐसा नारा लगाए जाने की संभावना बहुत कम है।
"सबसे पहली बात, भारतीय जनता पार्टी (एक राजनीतिक दल) द्वारा आयोजित प्रदर्शन में, यह सोचना भी मुश्किल है कि वहां मौजूद प्रदर्शनकारी 'पाकिस्तान जिंदाबाद' का नारा लगाएंगे।"
इस संदर्भ में, कोर्ट ने आरोपी व्यक्ति के इस तर्क पर भी विचार किया कि प्रदर्शन के दौरान 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' (पाकिस्तान का नाश हो) के बजाय गलती से 'पाकिस्तान जिंदाबाद' का नारा लग गया था।
कोर्ट ने कहा, "याचिकाकर्ता के इस तर्क पर विचार किया जाना चाहिए कि नारे लगाते समय, गलती से 'मुर्दाबाद' की जगह 'जिंदाबाद' शब्द निकल गया।"
अंत में, कोर्ट ने माना कि आरोपी प्रदर्शनकारी, डी.एस. रवि कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना अनावश्यक है और यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
अदालत, डी.एस. रवि कुमार द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने मांड्या की एक ट्रायल कोर्ट में चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।
यह मामला 2024 में मांड्या वेस्ट पुलिस द्वारा दर्ज किए गए एक केस से जुड़ा है, जिसमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153B (राष्ट्रीय एकता के खिलाफ बयान या दावे) और 505(1)(b) (सार्वजनिक उपद्रव) के तहत अपराध दर्ज किए गए थे।
कन्नमबाड़ी कुमार नाम के एक व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में 18 दिसंबर 2022 को हुए एक प्रदर्शन का जिक्र था, जिसे भाजपा समर्थकों द्वारा आयोजित किया गया बताया गया था।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि प्रदर्शन में शामिल लोगों ने 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे लगाए। उन्होंने दावा किया कि इस घटना का वीडियो देखने के बाद वे मानसिक रूप से परेशान हो गए और उन्होंने पुलिस से कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल एक आरोपी, रवि कुमार ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और केस को रद्द करने की अपील की। उनके वकील ने तर्क दिया कि यह नारा न तो जानबूझकर लगाया गया था और न ही इसका मकसद समाज में अशांति फैलाना था।
वकील ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान जोश में ये शब्द अनजाने में निकल गए। याचिकाकर्ता के अनुसार, 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' की जगह गलती से 'पाकिस्तान जिंदाबाद' का नारा लग गया था।
याचिकाकर्ता ने आगे तर्क दिया कि उनका मकसद सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना या किसी खास समुदाय को निशाना बनाना नहीं था, इसलिए इस आपराधिक कार्यवाही को जारी रखना उचित नहीं है।
राज्य सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस को दी गई वीडियो क्लिप में साफ तौर पर 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे सुनाई दे रहे हैं।
राज्य के वकील ने बताया कि यह प्रदर्शन 18 दिसंबर 2022 को पाकिस्तान के विदेश मंत्री द्वारा दिए गए एक आपत्तिजनक बयान के विरोध में आयोजित किया गया था।
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि रवि कुमार ने समाज में अशांति फैलाने के इरादे से जानबूझकर 'पाकिस्तान जिंदाबाद' का नारा लगाया था, और इसलिए उन पर मुकदमा चलना चाहिए।
हालांकि, अदालत ने माना कि भाजपा रैली में शामिल किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर ऐसे नारे लगाने की संभावना कम है। अदालत ने कुमार के इस दावे पर भी गौर किया कि 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' की जगह गलती से 'पाकिस्तान जिंदाबाद' का नारा लग गया था। अदालत ने शिकायत दर्ज कराने में हुई दो साल की देरी पर भी ध्यान दिया।
अदालत ने कहा, "जो भी हो, दूसरे प्रतिवादी ने यूट्यूब चैनल पर जारी एक वीडियो क्लिप के आधार पर शिकायत दर्ज कराई है, और वह भी घटना के 2 साल बीत जाने के बाद।"
इसके अलावा, हाई कोर्ट ने पाया कि जांच में प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान नहीं हो सकी, और न ही यह साबित हो सका कि कथित नारे लगाए जाने के बाद समाज में कोई अशांति फैली।
अदालत ने कहा, "जांच एजेंसी यह पता नहीं लगा सकी कि इस प्रदर्शन में कौन-कौन शामिल था, और ऐसे नारे लगाने का समाज पर क्या असर पड़ा—क्या इससे किसी विशेष समुदाय या आम जनता के बीच कोई अशांति पैदा हुई?"
हाई कोर्ट ने IPC की धारा 505(1)(b) के तहत किसी आरोपी पर मुकदमा चलाने के लिए जरूरी 'पूर्व मंजूरी' (prior sanction) के नियम की भी जांच की। अदालत ने पाया कि इस मामले में मजिस्ट्रेट ने बिना आवश्यक मंजूरी के ही अपराध का संज्ञान ले लिया था।
अदालत ने यह भी माना कि इस मामले में IPC की धारा 153B के तहत अपराध के तत्व मौजूद नहीं हैं।
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि इस आपराधिक मामले को आगे चलाना उचित नहीं है, और कुमार की याचिका को स्वीकार करते हुए मामले को रद्द कर दिया।
अदालत ने कहा, "इसलिए, इस अदालत की राय में, इस आपराधिक मामले को जारी रखना अनावश्यक है और यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।"
याचिकाकर्ता की ओर से वकील विनोद कुमार एम पेश हुए।
राज्य की ओर से हाई कोर्ट की सरकारी वकील वहीदा एमएम पेश हुईं।
[फैसला पढ़ें]
और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें