E20 फ़्यूल के लिए ज़िम्मेदार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट में नितिन गडकरी ने अपने मुक़दमे में यह दावा किया है

गडकरी ने दावा किया है कि E20 पॉलिसी पेट्रोलियम मंत्रालय ने बनाई थी और वही इसे लागू कर रहा है, न कि उनके नेतृत्व वाला परिवहन मंत्रालय।
Nitin Gadkari
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केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मेटा, X और गूगल के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। वे अपमानजनक पोस्ट और AI से बने डीपफेक को हटाने की मांग कर रहे हैं, जिनमें उन्हें और उनके परिवार को सरकार के E20 इथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम और उससे जुड़े कथित भ्रष्टाचार से जोड़ने वाले पोस्ट भी शामिल हैं।

पिछले कुछ महीनों में, देश में E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण) लाने के कारण गडकरी आलोचनाओं के घेरे में रहे हैं।

E20 प्रोग्राम, कच्चे तेल के आयात को कम करने, प्रदूषण घटाने और देश में बने बायोफ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की भारत सरकार की रणनीति का एक अहम हिस्सा है।

हालांकि, E20 फ्यूल के आने से यह चिंता भी पैदा हुई है कि जो पुरानी गाड़ियां खास तौर पर E20 के लिए नहीं बनी हैं, उनमें कम्पैटिबिलिटी की दिक्कतें, फ्यूल सिस्टम में जंग और माइलेज कम होने जैसी समस्याएं आ सकती हैं।

मैन्युफैक्चरर्स अब E20-कम्पैटिबल गाड़ियां ज़्यादा बना रहे हैं, लेकिन 2023 से पहले बेची गई गाड़ियों की कम्पैटिबिलिटी को लेकर अभी भी सवाल बने हुए हैं।

हाल ही में, छत्तीसगढ़ के रायपुर में ज़िला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कार बनाने वाली कंपनी मारुति सुज़ुकी को आदेश दिया कि वह एक व्यक्ति को E20-कम्पैटिबल इंजन वाली नई ग्रैंड विटारा कार दे। उस व्यक्ति की कार कथित तौर पर E20 फ्यूल के इस्तेमाल के कारण खराब हो गई थी।

गाड़ियों के शौकीन और एक्सपर्ट्स गडकरी के खिलाफ़ तेज़ी से आवाज़ उठा रहे हैं क्योंकि उन्होंने गाड़ी मालिकों को कम इथेनॉल वाले सामान्य फ्यूल को चुनने का विकल्प दिए बिना ही E20 फ्यूल लागू कर दिया।

वकील संदीप लड्डा के ज़रिए दायर मुकदमे में गडकरी ने दावा किया है कि E20 पॉलिसी बनाने या लागू करने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी; यह पॉलिसी पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत आती है।

उनका कहना है कि वायरल रील्स, मीम्स और मनगढ़ंत बयानों ने राजनीतिक आलोचना की सीमा पार करके किसी को खास तौर पर बदनाम करने का रूप ले लिया है।

गडकरी ने अपने मुकदमे में असल में क्या दावा किया है?

जानने के लिए आगे पढ़ें।

गडकरी ने किसके खिलाफ और क्यों केस किया है?

गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम), X (पहले ट्विटर), गूगल/यूट्यूब, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग और "अशोक कुमार/जॉन डो" के तौर पर बताए गए कई अज्ञात यूज़र्स के खिलाफ सिविल केस दायर किया है।

'जॉन डो' ऑर्डर ऐसे व्यापक आदेश होते हैं जो अज्ञात लोगों या संस्थाओं के खिलाफ जारी किए जाते हैं। ये आमतौर पर बौद्धिक संपदा अधिकारों (intellectual property rights) के उल्लंघन से जुड़े मामलों में जारी किए जाते हैं, क्योंकि अक्सर उल्लंघन करने वाले हर व्यक्ति या संस्था का पता लगाना व्यावहारिक रूप से असंभव होता है।

उन्होंने कथित तौर पर हेरफेर किए गए (manipulated) उन वीडियो और तस्वीरों को हटाने के लिए स्थायी और अनिवार्य आदेश (injunctions) की मांग की है, जिन्हें AI से बने "मानहानि करने वाले कंटेंट" और "डीप फेक कंटेंट" के तौर पर बताया गया है। उनका कहना है कि ये कंटेंट उन्हें व्यक्तिगत रूप से E20 प्रोग्राम से गलत तरीके से जोड़ते हैं और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं।

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Not responsible for E20 fuel: Here is what Nitin Gadkari has claimed in his suit before Bombay High Court

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