

एक्टर श्रुति हासन ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। वह अपने पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी अधिकारों की सुरक्षा चाहती हैं और AI से बने या मॉर्फ़ किए गए कंटेंट, फ़ेक एंडोर्समेंट और बिना इजाज़त बेचे जाने वाले सामान के ख़िलाफ़ निर्देश चाहती हैं, जो इन अधिकारों का उल्लंघन करते हैं [श्रुति हासन बनाम महालक्ष्मी आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स वर्क और अन्य]।
जस्टिस अभय आहूजा ने आज उन्हें 'लेटर्स पेटेंट' के क्लॉज़ XII के तहत इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (बौद्धिक संपदा अधिकारों) के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कमर्शियल केस दायर करने की अनुमति दे दी।
ऐसी इजाज़त तब ज़रूरी होती है जब मामले की वजह (cause of action) कोर्ट के अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) के बाहर पैदा होती है, जिससे कोर्ट अधिकार क्षेत्र की सीमाओं के बावजूद केस की सुनवाई कर सकता है।हासन ने कई भारतीय और विदेशी संस्थाओं, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और अज्ञात (जॉन डो) प्रतिवादियों के ख़िलाफ़ केस दायर किया है।
प्रतिवादियों में 'महालक्ष्मी आर्ट्स एंड क्राफ़्ट वर्क्स' भी शामिल है, जो कथित तौर पर बिना इजाज़त के फ़्लिपकार्ट पर हासन के नाम और तस्वीर वाले पोस्टर बेचती है।
अन्य प्रतिवादियों में सेलिब्रिटी बुकिंग और एंडोर्समेंट प्लेटफ़ॉर्म, फ़ैशन और ज्वेलरी प्लेटफ़ॉर्म और सोशल मीडिया कंपनियाँ शामिल हैं, जिनमें Google (YouTube), Meta (Facebook और Instagram), X Corp और Pinterest शामिल हैं।
हासन ने इन प्लेटफ़ॉर्म पर ऐसा कंटेंट होस्ट करने या उसे बढ़ावा देने का आरोप लगाया है जो उनके अधिकारों का उल्लंघन करता है, जिसमें AI से बने ऐसे वीडियो भी शामिल हैं जो उन्हें दूसरे अभिनेताओं के साथ रोमांटिक रिश्तों में गलत तरीके से दिखाते हैं।
केस में फ़र्ज़ी, अश्लील, शरीर दिखाने वाली तस्वीरें और यौन रूप से स्पष्ट वीडियो/तस्वीरें भी शामिल हैं, जिनमें जेनरेटिव AI और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल करके बनाया गया पोर्नोग्राफ़िक कंटेंट भी है।
हासन की याचिका में कहा गया है, "ये संस्थाएँ हासन के चेहरे को मॉर्फ़/सुपरइम्पोज़ करके AI और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं ताकि भद्दे और यौन रूप से स्पष्ट वीडियो और तस्वीरें बनाई जा सकें।"
उन्होंने अपने नाम, तस्वीर, शक्ल-सूरत और अपनी पहचान से जुड़ी अन्य विशेषताओं के बिना इजाज़त इस्तेमाल से होने वाले उनके व्यक्तित्व और नैतिक अधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए आदेश की माँग की है।
याचिका में कहा गया है कि हिंदी, तमिल, तेलुगु और अंग्रेज़ी सिनेमा के साथ-साथ संगीत और ब्रांड एंडोर्समेंट में उनके काम की वजह से उनके नाम को एक अलग पहचान मिली है और व्यापार जगत और आम जनता के बीच उन्हें अच्छी तरह से पहचाना जाता है।
केस में कहा गया है, "'श्रुति हासन' नाम के लगातार और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की वजह से, यह नाम खास तौर पर वादी (Plaintiff) की पहचान बन गया है।"
हासन ने स्थायी रोक (permanent injunctions), उल्लंघन करने वाले कंटेंट को हटाने, अज्ञात उल्लंघनकर्ताओं के ख़िलाफ़ 'जॉन डो' आदेश, साथ ही मुआवज़े और हासन के नाम या विशेषताओं के बिना इजाज़त इस्तेमाल से हुए मुनाफ़े का हिसाब देने की माँग की है।
इस मामले में अंतरिम राहत के लिए जस्टिस माधव जामदार के सामने सुनवाई होने की संभावना है।
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Shruti Haasan moves Bombay High Court against AI deepfakes, fake endorsements