

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट से आग्रह किया कि वह उस याचिका पर जल्द फैसला ले, जिसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष द्वारा 10 बागी तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने में की गई देरी का मुद्दा उठाया गया है। [शोभनदेब चट्टोपाध्याय बनाम अध्यक्ष]
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से कहा कि वे इस मामले को जल्द निपटाने के लिए एक डिवीज़न बेंच (खंडपीठ) के समक्ष रखें। उन्होंने आदेश दिया,
"हमें लगता है कि याचिकाकर्ता को कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख करना चाहिए। इसलिए, हम इस स्तर पर इस याचिका का निपटारा करते हैं और याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय में उचित याचिका दायर करने की छूट देते हैं। हम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करते हैं कि वे इस मामले को तत्काल विचार के लिए एक डिवीज़न बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करें और मामले का जल्द से जल्द निपटारा करें।"
अदालत, टीएमसी विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय द्वारा दायर एक नई याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने स्पीकर द्वारा की जा रही देरी को चुनौती दी थी।
इस साल 8 जुलाई को रिताब्रता बनर्जी, फिरहाद हकीम, अरूप रॉय, संदीपन साहा, अखरुज्जमां अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मीन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं दायर की गईं। इन लोगों ने टीएमसी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन बाद में पार्टी छोड़ दी। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से चुनाव हारने के बाद, टीएमसी में हुई इस टूट-फूट के चलते यह मामला सामने आया।
याचिका में अदालत से आग्रह किया गया कि वह स्पीकर को निर्देश दे कि वे 'केशम मेघचंद्र सिंह बनाम माननीय स्पीकर, मणिपुर विधानसभा (2021)' मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई समय-सीमा के भीतर अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लें।
चट्टोपाध्याय द्वारा पहले दायर की गई एक याचिका पर, अदालत ने कहा था कि उन्हें स्पीकर पर संदेह करने का कोई कारण नहीं दिखता और उम्मीद जताई थी कि वे पिछले मामलों में तय किए गए दिशा-निर्देशों और समय-सीमा का पालन करेंगे।
आज, चट्टोपाध्याय के वकील ने बताया कि इन याचिकाओं पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।
उन्होंने कहा, "अयोग्यता याचिका जुलाई की है। यह पूरी तरह से इस अदालत के आदेशों के दायरे में आती है। पांच महीने बीत चुके हैं।"
जस्टिस बागची ने जवाब दिया,
"हम आपकी बात समझते हैं। लेकिन आप अपनी बारी से पहले सुनवाई पाने के लिए कानूनी कार्यवाही नहीं कर सकते।"
इस पर वकील ने कहा,
"हमारी बस यही गुजारिश है कि हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच इस मामले पर विचार करे, ताकि यह मामला बाद में कोर्ट के भीतर होने वाली अपीलों (intra-court appeals) में न फंस जाए। हम चाहते हैं कि इसका जल्द से जल्द निपटारा हो। पश्चिम बंगाल से जुड़े मामले में इस अदालत का पहले से ही एक आदेश मौजूद है।"
उन्होंने यह भी बताया कि कलकत्ता हाई कोर्ट में 12 नवंबर तक छुट्टियां हैं। इस पर अदालत ने कहा,
"हमें इसकी जानकारी है। सिर्फ इसलिए कि हमने किसी एक मामले में आदेश दिया है, इसका मतलब यह नहीं है कि बाकी सभी याचिकाएं सीधे हमारे पास आ जाएं।"
अंत में, अदालत ने कलकत्ता हाई कोर्ट को इस याचिका का जल्द से जल्द निपटारा करने का निर्देश दिया।
इससे पहले, पार्टी ने चट्टोपाध्याय को 'नेता प्रतिपक्ष' (Leader of Opposition) के रूप में नामित किया था। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने बागी TMC विधायक रिताब्रत बंद्योपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी, और एक अन्य बागी विधायक को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बना दिया।
चट्टोपाध्याय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में इसे चुनौती दी थी, जिस पर हाल ही में खंडित फैसला (स्प्लिट वर्डिक्ट) आया है।
इस बीच, उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और सवाल उठाया कि अध्यक्ष ने विरोधी TMC खेमे के दस विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिकाओं पर अब तक कोई फैसला क्यों नहीं लिया है।
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Supreme Court asks Calcutta HC to urgently decide plea on disqualification of rebel TMC MLAs