

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और पूर्व विधायक नरेश बाल्यान की ज़मानत याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा। यह याचिका महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ़ ऑर्गनाइज़्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) के तहत दर्ज एक मामले के संबंध में दायर की गई थी [नरेश बाल्यान बनाम दिल्ली राज्य]।
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा बालियान को ज़मानत देने से इनकार करने के फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।
उन्हें 4 दिसंबर, 2024 को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि उनके संबंध फरार गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू द्वारा चलाए जा रहे एक संगठित अपराध सिंडिकेट से थे।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि बालियान ने सांगवान के सिंडिकेट के लिए "सुविधा प्रदाता" (facilitator) के तौर पर काम किया। उन्होंने जबरन वसूली के लिए लोगों की पहचान की, फर्जी प्रॉपर्टी एग्रीमेंट किए और बहुत कम कीमत पर जबरन प्रॉपर्टी बिकवाने का काम किया।
3 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें इस मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इंटरसेप्ट की गई मोबाइल बातचीत के आधार पर बालियान और अपराध सिंडिकेट के बीच स्पष्ट संबंध दिखाई देता है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि MCOCA जैसे विशेष कानूनों के तहत गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में, केवल लंबे समय तक जेल में रहने को ही जमानत देने का निर्णायक आधार नहीं माना जा सकता।
इससे पहले मार्च में, हाईकोर्ट की एक अन्य बेंच ने नरेश बालियान के खिलाफ जांच में देरी के लिए दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई थी। उस समय कोर्ट ने पुलिस को जांच में तेजी लाने और एक समय-सीमा (timeline) रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश भी दिया था।
बालियान ने लगातार अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने MCOCA लगाने को कानून का दुरुपयोग और राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बताया है।
31 जुलाई को दिल्ली की एक अदालत ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए बालियान के खिलाफ जबरन वसूली का एक मामला बंद कर दिया था।
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Supreme Court seeks Delhi government's response to bail plea by AAP's Naresh Balyan in MCOCA case