सुप्रीम कोर्ट ने TASMAC भ्रष्टाचार मामले में सेंथिल बालाजी की गिरफ्तारी पर रोक लगाई

अदालत ने पूर्व मंत्री द्वारा दायर अग्रिम ज़मानत याचिका पर अंतरिम आदेश पारित किया।
Senthil Balaji
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के विधायक वी. सेंथिल बालाजी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। यह मामला तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (TASMAC) के कामकाज में कथित अनियमितताओं से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले से संबंधित है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने यह अंतरिम आदेश तब दिया जब वे मद्रास हाई कोर्ट द्वारा इस मामले में अग्रिम ज़मानत देने से इनकार करने के खिलाफ़ बालाजी की अपील पर सुनवाई कर रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट ने बालाजी को चल रही जांच में सहयोग करने, अपना पासपोर्ट जमा करने और यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि अगले आदेश तक किसी भी गवाह को प्रभावित न किया जाए।

CJI Surya Kant and Justice Joymalya Bagchi
CJI Surya Kant and Justice Joymalya Bagchi

विजिलेंस और एंटी-करप्शन निदेशालय (DVAC) ने बालाजी और छह अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह मामला 2021 से 2025 के बीच TASMAC में शराब की खरीद, ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट, बार लाइसेंस और अन्य प्रशासनिक फैसलों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।

इस दौरान बालाजी तमिलनाडु के निषेध और आबकारी मंत्री भी रहे थे।

FIR दर्ज होने के बाद, DVAC अधिकारियों ने तमिलनाडु में 40 से ज़्यादा जगहों पर तलाशी ली, जिसमें करूर में बालाजी का घर और उनके पूर्व सहयोगियों व अन्य आरोपियों से जुड़ी जगहें शामिल थीं।

बालाजी के अलावा, इस मामले में TASMAC के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर एस विसाकन, पूर्व सीनियर रीजनल मैनेजर टी रामदुरई मुरुगन और आर पन्नीरसेल्वम, बालाजी के पूर्व पर्सनल असिस्टेंट भास्कर, कथित बिचौलिये रतेश राज शनमुगावेल और एस कार्तिक के नाम शामिल हैं।

DVAC के अनुसार, बार लाइसेंस टेंडर में कथित तौर पर कार्टेलाइज़ेशन, प्रॉक्सी ओनरशिप और लगातार नंबर वाले डिमांड ड्राफ्ट का इस्तेमाल करके हेरफेर की गई थी।

एजेंसी का आरोप है कि रतेश राज का TASMAC के कामकाज पर बहुत ज़्यादा असर था, जिसमें शराब ब्रांड को मंज़ूरी देना, अधिकारियों का ट्रांसफर और बार लाइसेंस का आवंटन शामिल था। विसाकन कथित तौर पर रतेश राज के निर्देशों पर काम करते थे, जो बालाजी की तरफ से आते थे।

एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ डिस्टिलरी ने इस्तेमाल की गई शराब की बोतलों से जुड़े इनवॉइस की कीमत बढ़ाकर बिना हिसाब-किताब वाला कैश बनाया। यह पैसा कथित तौर पर अच्छे सप्लाई ऑर्डर के बदले TASMAC अधिकारियों को रिश्वत के तौर पर दिया गया था।

FIR में यह आरोप भी है कि TASMAC आउटलेट्स ने अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से ज़्यादा पैसे वसूले। एजेंसी के अनुसार, ग्राहकों से कई शराब ब्रांड के लिए तय कीमत से ₹10 से ₹100 ज़्यादा और विदेशी शराब के लिए ₹500 तक ज़्यादा पैसे लिए गए।

मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस जीके इलानथिरायण ने 30 जुलाई को इस मामले में बालाजी की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

जब आज सुबह इस मामले की सुनवाई हुई, तो जस्टिस वी मोहना ने केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इसके बाद, आज दोपहर CJI कांत और जस्टिस बागची ने इस मामले की सुनवाई की।

सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने बालाजी का पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि तमिलनाडु में सरकार बदलने के बाद राज्य के एडिशनल सेक्रेटरी ने इस मामले में अपना बयान बदल दिया है। इस साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनावों के बाद, तमिलनाडु में 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) ने सरकार बनाई।

सीनियर एडवोकेट गुरु कृष्णकुमार ने तमिलनाडु सरकार का पक्ष रखा और बालाजी को किसी भी तरह की राहत देने का विरोध किया।

उन्होंने कहा, "सबूतों के साथ छेड़छाड़ का खतरा है। यह सिर्फ़ रिकॉर्ड की बात नहीं है। इस तरह के गंभीर भ्रष्टाचार के मामले में अग्रिम ज़मानत (anticipatory bail) क्यों दी जाए? देखिए यह कितना अजीब है। राज्य सरकार (जब DMK की सरकार थी) ने अर्ज़ी दायर कर कहा था कि ED को कोई कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। अब वे अपनी ही गलत हरकत का फ़ायदा उठाना चाहते हैं और कह रहे हैं कि राज्य को कोई कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।"

गुरु कृष्णकुमार ने आगे कहा कि बालाजी का आपराधिक इतिहास रहा है और उन पर छह गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा मामला सैकड़ों करोड़ रुपये के बड़े घोटाले से जुड़ा है।

CJI कांत ने टिप्पणी की, "जांच होने दीजिए। निष्पक्ष जांच होने दीजिए। अगर वह दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें सज़ा भुगतनी होगी।"

कृष्णकुमार ने पूछा, "अगर जांच के दौरान उन्हें हिरासत में लेना ज़रूरी हो जाए तो?"

जस्टिस बागची ने जवाब दिया, "तब हमारे पास आइए। ज़ाहिर है, वह भागेंगे नहीं। जैसा कि आप कह रहे हैं, वह पहले मंत्री रह चुके हैं। वह कोई जल्दबाज़ी या गलत कदम नहीं उठाएंगे। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि वह जांच में शामिल हों। हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि वह जांच में कोई दखल न दें। अगर कोई उल्लंघन होता है या उल्लंघन की आशंका होती है, तो कृपया हमारे पास आएं।"

इसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और बालाजी की अग्रिम ज़मानत याचिका पर विचार होने तक उनकी गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी।

एवोकेट वृंदा भंडारी भी तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश हुईं।

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Supreme Court stays arrest of Senthil Balaji in TASMAC corruption case

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