

चार महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के मामले में बृजभूषण शरण सिंह को बरी किए जाने को चुनौती देते हुए सेशंस कोर्ट का रुख किया है।
मैजिस्ट्रेट कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश के खिलाफ़ अपील पर शनिवार को सेशन जज सुनवाई कर सकते हैं।
खास बात यह है कि महिला पहलवानों ने इस मामले में सह-आरोपी विनोद तोमर के बरी होने को भी चुनौती दी है।
पहलवानों का कहना है कि ट्रायल कोर्ट का आदेश "अटकलों और अनुमानों" पर आधारित है और इसका तर्क यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ की शिकार महिलाओं के "अपेक्षित" व्यवहार के बारे में "पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं" पर टिका है।
यह कहा गया है कि ट्रायल कोर्ट ने छोटी-छोटी, गैर-ज़रूरी गलतियों पर ध्यान दिया और गवाहों की पुष्टि के साथ पूरी तस्वीर देखने के बजाय, उनका इस्तेमाल सिंह के खिलाफ़ पूरे मामले को खारिज करने के लिए किया।
यह मामला छह महिला पहलवानों द्वारा सिंह पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। उनकी शिकायतों के आधार पर, पुलिस ने सांसद के खिलाफ़ एफआईआर (FIR) दर्ज की थी।
15 जून, 2023 को पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना), 354A (यौन प्रकृति की टिप्पणी), 354D (पीछा करना) और 506(1) (आपराधिक धमकी) के तहत अपराधों के लिए सिंह के खिलाफ़ चार्जशीट दाखिल की।
ट्रायल कोर्ट ने 10 मई, 2024 को पांच महिला पहलवानों को परेशान करने के लिए सिंह पर यौन उत्पीड़न और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप तय किए।
हालांकि, 3 अगस्त, 2026 को ट्रायल कोर्ट ने सिंह और तोमर दोनों को इस मामले में बरी कर दिया।
ट्रायल कोर्ट ने कहा कि मामला "झूठा और मनगढ़ंत" था और "राजनीतिक" रूप से प्रेरित लग रहा था। कोर्ट ने पाया कि सिंह के खिलाफ़ आरोप पहले से तैयार, अच्छी तरह से अभ्यास किए गए और प्रायोजित (प्लांटेड) लग रहे थे, खासकर तब जब शिकायतें काफी समय बाद दर्ज की गई थीं।
कोर्ट ने माना कि 2023 में पहलवानों के धरने पर बैठने से पहले, PW 5 (महिला पहलवानों में से एक) द्वारा सिंह के खिलाफ़ यौन उत्पीड़न का कोई आरोप नहीं लगाया गया था और "किसी भी ऐसी महिला पहलवान का नाम नहीं लिया गया था जिसने कथित यौन उत्पीड़न का सामना किया हो"।
ट्रायल कोर्ट ने कहा, "इसके बाद चुनी गई महिला पहलवान सामने आईं और उन्हीं आरोपों को खास तौर पर तैयार की गई औपचारिक शिकायतों में शामिल किया गया—जिनमें बढ़ा-चढ़ाकर बातें लिखी गई थीं—और 21 अप्रैल 2023 को पुलिस के सामने ये शिकायतें दर्ज कराई गईं।"
कोर्ट ने यह भी गौर किया कि सिंह पर लगाए गए आरोप कई साल पुराने हैं और पीड़ित कई सालों तक चुप रहीं।
कोर्ट ने कहा कि कथित घटनाओं के बाद भी पीड़ित सिंह के साथ अच्छे संबंध बनाए रखे और उन्हें पारिवारिक कार्यक्रमों व शादी-ब्याह में बुलाया।
अब इस फैसले को सेशंस कोर्ट में चुनौती दी गई है।
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