केके वेणुगोपाल का जगनमोहन रेड्डी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही सहमति से इंकार, आंध्र के CM और उनके सलाहकार का आचरण दुराग्रहपूर्ण

पत्र का समय, इसका प्रकाशन अपने आप में ही ‘संदिग्ध’ था क्योकि सांसदों-विधायको के खिलाफ लंबित मामलों के तेजी से निबटारे के लिये न्यायमूर्ति रमना की अध्यक्षता वाली पीठ के आदेश के तुरंत बाद ऐसा किया गया
केके वेणुगोपाल का जगनमोहन रेड्डी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही सहमति से इंकार, आंध्र के CM और उनके सलाहकार का आचरण दुराग्रहपूर्ण
Jaganmohan ReddyFacebook

अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी और उनके प्रधान सलाहकार अजय कल्लम के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिये अपनी सहमति देने से इंकार कर दिया है।

अटार्नी जनरल ने ऐसा करते समय कहा है कि उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति एनवी रमना के के खिलाफ आरोप लगाने का उनका आचरण ‘दुराग्रहपूर्ण’ था।

पिछले सप्ताह, उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता और भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने अटार्नी जनरल वेणुगोपाल को एक पत्र लिखकर मुख्यमंत्री रेड्डी और कल्लम के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिये अपनी सहमति देने का उनसे अनुरोध किया था।

उपाध्याय ने कहा था कि मुख्यमंत्री रेड्डी द्वारा मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे को लिखे पत्र में न्यायमूर्ति रमना और दूसरे न्यायाधीशों पर लगाये गये आरोप उच्चतम न्यायालय और आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के अधिकार को बदनाम करने वाले हैं।

इस पत्र के जवाब में अटार्नीजनरल वेणुगोपाल ने स्वीकार किया कि रेड्डी द्वारा भेजे गये पत्र में निश्चित ही "आपत्तिजनक वक्तव्य’ दिये गये थे और ‘‘मुख्य न्यायाधीश इस पत्र में लगाये गये आरोपों की प्रकृति भली भांति जानते हैं।’’

अटार्नी जनरल ने आगे लिखा है कि ‘पत्र का समय’ और इसके प्रकाशन का समय अपने आप में ही ‘संदेहास्पद’ है क्योंकि यह न्यायमूर्ति रमना की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा सांसदों-विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के तेजी से निबटारे पर जोर दिये जाने के तुरत बाद किया था।

उपाध्याय के पत्र के जवाब में अटार्नी जनरल ने लिखा, ‘‘जैसा कि आपने खुद ही इंगित किया है कि उनके खिलाफ अक्टूबर तक 31 आपराधिक मामले लंबित थे।’’

अटार्नी जनरल ने इस तथ्य का जिक्र करते हुये कि ‘पहली नजर में’ इन व्यक्तियों का आचरण दुराग्रहपूर्ण है, इनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिये सहमति देने से इंकार कर दिया और कहा कि प्रधान न्यायाधीश बोबडे के पास पहले से ही यह मामला है।

उपाध्याय ने अपने पत्र में कहा था कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री खुद ही भ्रष्टाचार निवारण कानून और धन शोधन रोकथाम कानून के तहत कम से कम 31 मामलों में आरोपी हैं। यह मामले तेलंगाना के अधिकार क्षेत्र में विशेष अदालत में लंबित हैं।

उपाध्याय ने कहा था, ‘‘उन्हें जमानत मिली हुयी है और इन मुकदमों की सुनवाई जारी रहने के दौरान वह लोक सेवक के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं।"

सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मुकदमों की सुनवाई के लिये विशेष अदालतें गठित करने के बारे में अपनी याचिका लंबित होने का उल्लेख करते हुये उपाध्याय ने इस पत्र में कहा था कि उच्चतम न्यायालय को अक्टूबर में तेलंगाना राज्य ने सूचित किया था कि सांसदों-विधायकों के खिलाफ उनके यहां दैनिक आधार पर सुनवाई शुरू होगी। अत: रेड्डी इससे सीधे प्रभावित हैं क्योंकि वह विधायक भी हैं जिन पर मुकदमा चल रहा है।

उन्होंने आगे लिखा था,

‘‘अगर इस तरह की मिसाल कायम होने दी गयी तो राजनीतिक व्यक्ति उन न्यायाधीशों के खिलाफ आरोप लगाना शुरू कर देंगे जो उनके पक्ष में मुकदमे का फैसला नहीं देंगे और यह प्रवृत्ति जल्द ही न्यायपालिका की स्वतंत्रता खत्म कर देगी।’’

रेड्डी द्वारा न्यायमूर्ति रमना के खिलाफ विस्तृत आरोप लगाते हुये प्रधान न्यायाधीश बोबउे को लिखे पत्र का जिक्र करते हुये उपाध्याय ने इसे ‘अपमानजनक’ और सांसदों-विधायकों के खिलाफ मुकदमों की तेजी से सुनवाई के लिये उनकी याचिका में हस्तक्षेप का प्रयास बताया है। पत्र में कहा गया है,

‘‘मुख्यमंत्री और कल्लम द्वारा देश की न्यायपालिका पर दुस्साहपूर्ण हमला किया गया है जिसकी कोई मिसाल नहीं है। मुख्य न्यायाधीश के पास मामला लंबित होने के दौरान इस पत्र का समय, इसका विवरण और उसका सार्वजनिक रूप से खुलासा और कल्लम द्वारा अलग से जारी बयान यह स्पष्ट करता है कि ऐसा न्याय की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने और न्यायालय की प्रतिष्ठा कम करने की मंशा से किया गया है।’’

कल्लम के खिलाफ अवमानना का मामला दायर करने का अनुरोध करते हुये उपाध्याय ने पत्र में लिखा था कि प्रधान सलाहाकार "एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी है और उसे इस तरह की सामग्री प्रेस में जारी करने के नतीजों के बारे में भलीभांति जानकारी होगी।’’

उपाध्याय ने यह भी कहा, ‘‘उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पढ़ा गया वक्तव्य (पत्र नहीं) आंध्र प्रदेश सरकार का नजरिया दर्शाता है।’’

उपाध्याय ने अन्य बिन्दुओं के अलावा इन आधार पर अटार्नी जनरल वेणुगोपाल से न्यायालय की अवमानना कानून, 1971 और उच्चतम न्यायालय की अवमानना से संबंधित कार्यवाही संबंधी नियमों के नियम 3 के तहत सहमति देने का अनुरोध किया था।

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Conduct of Andhra CM and his advisor "contumacious": AG KK Venugopal declines consent for contempt against YS Jaganmohan Reddy

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