

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक नोटिस जारी किया। यह नोटिस राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की ओर से दायर एक याचिका पर जारी किया गया है, जिसमें उन्होंने कथित IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपने खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है।
जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि यादव ट्रायल कोर्ट के सामने सुनवाई टालने (स्थगन) की मांग भी कर सकते हैं।
यह मामला 30 अक्टूबर को ट्रायल कोर्ट में सूचीबद्ध है। हाई कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को करेगा।
राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (PC एक्ट) विशाल गोगने ने 10 सितंबर को यादव, उनके परिवार के सदस्यों - तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी - तथा कई अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय किए।
13 अक्टूबर 2025 को, कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव और अन्य लोगों पर भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का आरोप है कि जब यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे, तब उन्होंने एक निजी कंपनी को ठेके (कॉन्ट्रैक्ट) देने के बदले में रिश्वत के तौर पर कीमती ज़मीन और शेयर लिए थे।
आरोपों के अनुसार, 2004 से 2009 के बीच यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान, रांची और पुरी में IRCTC के दो होटल एक 'हेराफेरी वाली' टेंडर प्रक्रिया के ज़रिए 'सुजाता होटल्स' नाम की कंपनी को लीज़ पर दे दिए गए थे। इसके बदले में, करोड़ों रुपये की ज़मीन लालू की पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव से जुड़ी बताई जाने वाली एक कंपनी को, उसकी बाज़ार कीमत से बहुत कम दाम पर ट्रांसफर कर दी गई थी।
CBI की FIR के आधार पर, बाद में ED ने लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ PMLA के तहत मामला दर्ज किया।
यादव परिवार ने इस जांच पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। उनका कहना है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
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Delhi High Court seeks ED reply to Lalu Yadav's plea against money laundering charge in IRCTC case